*31 जुलाई को हुई मौत, विभाग ने अगस्त में 22 दिन
नाश्ता और 16 दिन भोजन करवाया
राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो) बिरसा क्षेत्र के ग्राम बोंदारी निवासी सचिन पिता चैनसिंह मरकाम की 01 अगस्त को उपचार के दौरान मौत हो गयी थी। सचिन उन बच्चों में शामिल था जिनकी मौत मिजल्स संक्रमण के दौरान हुई थी। लेकिन पोषण ट्रेकर रिकार्ड में मृत सचिन को 22 दिन नाश्ता और 16 दिन भोजन कराया गया। इससे जाहिर है कि पोषण आहार के नाम पर किस तरह भ्रष्टाचार हो रहा है।

एप में कैसे दर्ज हो गया सचिन
सवाल यह है कि आखिर यह रिकार्ड किस आधार पर दर्ज हुआघ। क्या आंगनबाड़ी स्तर पर लाभार्थियों की सूची अपडेट नहीं की गई, या फिर बिना वास्तविक सत्यापन के पोषण ट्रेकर में आंकड़े दर्ज किए जाते रहे है। यदि पोषण ट्रेकर में किसी मृत बच्चे के नाम पर भी लगातार भोजन और नाश्ता वितरित होना दर्ज हो सकता है तो फिर एप में दर्ज आंकड़ों की जमीनी सत्यता जांचने की जिम्मेदारी किसकी है।
सचिन का रिकार्ड क्यों बनाया गया
यह मामला केवल एक बच्चे के नाम की गलत एंट्री का नहीं है। यदि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी सही है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस बच्चे को पोषण आहार का लाभ मिलना ही संभव नहीं था उसका रिकार्ड आखिर क्यों बनाया गया।क्या संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चांे की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन हुआ।क्या सेक्टर सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी द्वारा रिकार्ड की समीक्षा की गई।क्या मृत बच्चों के नाम पोषण ट्रेकर से हटाने की कोई नियमित प्रक्रिया है।
विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कहां थे
सवाल यह भी है कि क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी हर माह डिजिटल आंकड़ों का भौतिक सत्यापन करते हैं। पोषण ट्रेकर एप्प को सरकार ने निगरानी का मजबूत माध्यम जरूर बनाया है।लेकिन यदि जमीन पर सत्यापन के बजाय केवल मोबाइल एप में आंकड़े दर्ज करना ही समीक्षा का आधार बन जाए तो डिजिटल सिस्टम पारदर्शिता पर ऐसे दाग लगना लाजमी है।
उच्च स्तरीय जांच जरूरी
बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण और बच्चों की बीमारी को लेकर पहले से गंभीर परिस्थितियां सामने आती रही हैं। ऐसे समय में यदि मृत बच्चों के नाम पर भी पोषण घोटाला होता है तो महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच जरूरी हो जाती है।