राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।कान्हा टाइगर रिजर्व में उपचाराधीन एक मादा बाघ की मौत हो गई। मादा बाघ का उपचार मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्य प्राणी उपचार केंद्र में विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा था। वन विभाग के अनुसार 26 अगस्त को मादा बाघ कमजोर और अकेली अवस्था में मिली थी। इसके बाद उसे उपचार केंद्र लाकर 27 अगस्त से विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया था।

अपेक्षित सुधार नहीं हो सका
वन विभाग की टीम द्वारा लगातार मादा बाघ के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही थी। उपचार के दौरान उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और अंततः उसकी मौत हो गई। मादा बाघ में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के लक्षण भी पाए गए थे। हालांकि, उसकी मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। मादा बाघ की मौत के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत पोस्टमार्टम कराया गया।
बाघ के शव का अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए जैविक नमूनों को आगे की जांच के लिए जबलपुर स्थित फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत मादा बाघ के शव का अंतिम संस्कार किया। कान्हा टाइगर रिजर्व के उपसंचालक प्रकाश कुमार वर्मा ने मादा बाघ की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बाघ को कमजोर अवस्था में मिलने के बाद उपचार दिया जा रहा था और विशेषज्ञ लगातार उसकी निगरानी कर रहे थे।