अवैध रेत खनन के विवाद में लाठियां चली,6 लोग घायल - rashtrmat.com

अवैध रेत खनन के विवाद में लाठियां चली,6 लोग घायल

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।जिले के भरवेली थाना क्षेत्र अंतर्गत रट्टा गांव में अवैध शराब, रेत और गिट्टी उत्खनन को लेकर लंबे समय से पनप रहा ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार हिंसक टकराव में बदल गया।रट्टा गांव में रविवार को नाले से सामग्री ले जाने को लेकर एक विवाद हो गया। विवाद के दौरान लाठी-डंडे चलने से 6 लोग घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है की मामला अवैध रेत के उत्खनन से जुड़ा है, जबकि पुलिस के मुताबिक विवाद पत्थर ले जाने को लेकर हुआ है।
ग्रामीणों ने जमकर तोड़फोड़ की
एक ग्रामीण से मारपीट के बाद मामला इतना बढ़ा कि सरपंच और उपसरपंच के साथ भी मारपीट की घटना हो गई। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।देखते ही देखते गांव में लाठी-डंडे चलने लगे और एक पक्ष के घर में गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर तोड़फोड़ की। जहाँ ग्रामीणों ने दमाहे परिवार के घर मे खडे चौपाहिया वाहन, दोपहिया वाहन, ट्रेक्टर मे जमकर तोड़फोड़ की। गांव मे तनावपूर्ण स्थिति बन गई और पूरा गांव पुलिस छावनी मे बदल गया।
गांव में लंबे समय से विवाद
  ग्रामीणों का आरोप है कि रामचरण दमाहे और उनके परिवार के सदस्य ज़िलालाल दमाहे, रोमन दमाहे, करण, अर्जुन, ओमकार, राजेश और सेवाकराम लिल्हारे को लेकर गांव में लंबे समय से विवाद  है। ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार पर रेत और गिट्टी के अवैध उत्खनन के साथ ही अवैध शराब सहित अन्य   आरोप लगते रहे हैं। ज़ब ग्रामीणो ने द्वारा इन गतिविधियों का विरोध किया जाता है तो  विवाद और मारपीट की स्थिति बनती है।

ट्रैक्टर देखने के बाद विवाद

प्रत्यक्षदर्शी महेंद्र राणा ने बताया कि मुकेश दूध बेचने का काम करता है। उसने रट्टा नाले के पास ट्रैक्टर देखे जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद वह मौके पर पहुंचा, जहां उसके साथ मारपीट की गई। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य लोगों के साथ भी लाठी-डंडों से मारपीट की गई, जिसमें वे घायल हुए।

राजस्व विभाग की निगरानी आखिर कहां थी

 सवाल यह है कि यदि ग्रामीण लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतें कर रहे थे, तो संबंधित खनिज और राजस्व विभाग की निगरानी आखिर कहां थी? रेत और गिट्टी का उत्खनन यदि नियमों के विपरीत हो रहा था तो जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? और यदि आरोप गलत हैं तो विभाग मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
घेर लिया और  जमकर लाठी डंडे चले
  27 सितंबर की सुबह  विवाद की शुरुआत दूध का व्यापार करने वाले ग्रामीण मुकेश मसकोले के साथ हुई मारपीट से हुई। जहाँ दमाहे परिवार के द्वारा दूधवाले के साथ मारपीट की गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद सरपंच और उपसरपंच मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराने का प्रयास किया, तो उनके साथ भी दमाहे परिवार ने मारपीट कर लीं। इसके बाद गांव में तनाव बढ़ गया और बड़ी संख्या में ग्रामीणो ने रामचरण दमाहे के घर क़ो घेर लिया और  जमकर लाठी डंडे चले।
जमकर तोड़फोड़ की
दहशत मे दमाहे परिवार और उनके घर आये मेहमान घर मे कैद हो गए। जिसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया और गुस्साए लोगो ने उनके घर जमकर तोड़फोड़ की। जहाँ इस हिंसक झड़प में कई ग्रामीण घायल हुए हैं। जिनमे घायल में मुकेश मर्सकोले पेंडीटोला, महेश राणा, विजय राणा, जानू सिंह टेकाम, बब्बू मड़वी, कमला मर्सकोले समेत अन्य घायल है, जिनको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं जितेंद्र राणा उपसरपंच, रवि कुमरे सरपंच, दिनेश ठाकरे, पवन राणा, मुकेश चौधरी सहित अन्य को मामूली घोटे आई हैं।घायलों में लक्ष्मण पिता कन्हैया मरावी (47), मुकेश पिता कपूरचंद मर्सकोले (38), जामुसिंह पिता सुमेरी टेकाम (55), महेश पिता ज्ञानीराम (52), शगुन पति लक्ष्मण मेरावी (42) और तुलसी पति रूपलाल टेकाम (42) शामिल हैं।
गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई
  इस पूरे घटनाक्रम ने सिर्फ गांव की कानून-व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि अवैध खनन पर निगरानी रखने वाले सरकारी तंत्र पर भी गंभीर सवाल  हैं। किसी भी परिवार या व्यक्ति की कथित दबंगई इतनी नहीं हो सकती कि ग्रामीणों को शिकायत करने या विरोध करने से डर लगे। वहीं दूसरी ओर, विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेना और तोड़फोड़ करना भी किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। फिलहाल पुलिस ने गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। वही इस हिंसक झड़प मे घायल लोगो के बयान लेकर उनकी शिकायत दर्ज की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *