राष्ट्रमत न्यूज,भोपाल/जबलपुर(ब्यूरो)। बिहार के चारा घोटाले की तरह मध्यप्रदेश के जबलपुर में धान घोटाला हुआ है। स्कूटर और बसों से धाना परिवहन दिखाया गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को जल्द जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सामने आए करीब 34 करोड़ रुपए के धान परिवहन घोटाले की राज्य स्तरीय जांच कराई जाएगी।सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यदि तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने सक्रियता नहीं दिखाई होती तो यह मामला सामने नहीं आता।

स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को शपथ पत्र के साथ जवाब देने और आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) को अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
स्कूटर और बसों से भी धान परिवहन
यह मामला नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा है। याचिकाकर्ताओं पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि जबलपुर में जांच के दौरान धान परिवहन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी।
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90 से ज्यादा FIR दर्ज हुईं
याचिकाकर्ता के मुताबिक जबलपुर में जांच के बाद अलग-अलग लोगों के खिलाफ 90 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि जिस तरह की गड़बड़ी जबलपुर में सामने आई, उससे संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है।याचिका में बताया गया कि मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी समेत कुछ जिलों में भी मामले दर्ज किए गए, लेकिन प्रदेश के बाकी हिस्सों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदेश स्तर पर इसकी जांच जरूरी
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कार्रवाई सीमित रही। सरकार की ओर से पहले बताया गया था कि कुछ अन्य जिलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।याचिकाकर्ता ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सिर्फ एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। घोटाले की व्यापकता को देखते हुए प्रदेश स्तर पर इसकी जांच जरूरी है।