रायपुर में अब गीला-सूखा नहीं, 4 तरह से अलग करना होगा कचरा - rashtrmat.com

रायपुर में अब गीला-सूखा नहीं, 4 तरह से अलग करना होगा कचरा

राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर(ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अब कचरा व्यवस्था अब पहले जैसे नहीं रहेगा। अब रायपुर में कचरा चार डिब्बों में अलग अलग रखना पड़ेगा। ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर लागू नए नियमों का असर अब शहरों में भी दिखाई देने लगेगा।जो नए नियम को नहीं मानेंगे उस पर जुर्माना लगेगा। रायपुर नगर निगम कार्यालय में नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रावधानों के साथ नागरिकों और संस्थानों और बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई।

कचरा अलग करना होगा

रायपुर में कचरा उठाने से लेकर उसके निपटारे तक की व्यवस्था अब नए तरीके से की जाएगी। भारत सरकार की ‘प्रगति 50’ योजना में देश के 50 शहरों को शामिल किया गया है। इनमें छत्तीसगढ़ से रायपुर और बिलासपुर भी हैं। यह जानकारी नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने दी।केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 भी लागू किए हैं। नए नियमों के तहत घरों और संस्थानों में कचरा अलग-अलग रखना जरूरी होगा। कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा अलग करना होगा।

वैज्ञानिक प्रसंस्करण को आसान बनाना

नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार अलग.अलग श्रेणियों में रखना अनिवार्य किया गया है। इसमें गीला कचरा सूखा कचरा स्वच्छता अपशिष्ट और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग.अलग रखने की व्यवस्था शामिल है। इसका उद्देश्य कचरे को संग्रहण के बाद दोबारा अलग करने की जरूरत कम करना और पुनर्चक्रण व वैज्ञानिक प्रसंस्करण को आसान बनाना है।

रायपुर में वैज्ञानिक व्यवस्था बनाने पर जोर

रायपुर नगर निगम आयुक्त समित मिश्रा ने पत्रकार.वार्ता में नए नियमों और शहर में इनके प्रभावी क्रियान्वयन की कार्ययोजना की जानकारी दी। नई व्यवस्था का लक्ष्य केवल घरों और संस्थानों से कचरा उठाना नहीं बल्कि कचरे के स्रोत से लेकर संग्रहणए परिवहनए प्रसंस्करणए पुनर्चक्रण और अंतिम वैज्ञानिक निपटान तक पूरी श्रृंखला को व्यवस्थित करना है।

सीधा असर आम नागरिकों पर भी पड़ेगा

नई व्यवस्था का सीधा असर आम नागरिकों पर भी पड़ेगा। कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगी। घरों और संस्थानों को कचरा निकलते समय ही उसका पृथक्करण करना होगा। निर्धारित श्रेणी के अनुसार कचरा देने से संग्रहणए छंटाई और प्रसंस्करण की पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सीधा प्रभाव

नए नियमों में थोक कचरा उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की गई हैं। 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफलए प्रतिदिन 40 हजार लीटर या उससे अधिक पानी की खपत अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे ज्यादा ठोस कचरा पैदा करने वाली संस्थाएं इस श्रेणी में आएंगी। बड़े आवासीय परिसरोंए संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

ऑनलाइन होगी मॉनिटरिंग

नए नियमों में कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी पर भी जोर दिया गया है। कचरा पैदा होने से लेकर उसके संग्रहणए परिवहनए प्रसंस्करण और अंतिम निपटान तक की गतिविधियों को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि कचरा किस स्तर पर और किस प्रक्रिया से गुजर रहा है।

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