राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली(ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में राज्य की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी को लगातार झटके पर झटके लग रहे हैं। बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के अंदर संकट और गहरा गया क्योंकि अब खबर है कि जादवपुर लोकसभा सांसद सयानी घोष भी बागी गुट में शामिल हो गईं हैं। ममता बनर्जी की करीबी रहीं सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सांसद से इस्तीफा दे दिया। साथ ही टीएमसी पार्टी भी छोड़ दी।

सुष्मिता भाजपा में शामिल हो सकती हैं
ममता बनर्जी की करीबी रहीं सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सांसद से इस्तीफा दे दिया। साथ ही टीएमसी पार्टी भी छोड़ दी। इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता की असम सीएम हिमंता बिस्व सरमा के साथ मुलाकात की एक तस्वीर भी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, सुष्मिता भाजपा में शामिल हो सकती हैं।
बागी गुट के साथ जुड़ रहे हैं
सूत्रों के मुताबिक, सयानी घोष ने काकोली घोष दस्तीदार से संपर्क किया, अलग हुए गुट को अपना समर्थन दिया और उस गुट के समर्थन वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी पहले से ही अपनी सबसे बड़ी अंदरूनी बगावत का सामना कर रही है। कई सांसद पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और बागी गुट के साथ जुड़ रहे हैं।

दो राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं
पिछले 3 दिनों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी। इस्तीफे में उन्होंने ममता के 15 साल के अराजक शासन को पार्टी की हार का नतीजा बताया था।
कुल 22 सांसद टूट चुके हैं
टीएमसी के लोकसभा में 28 में से 20 सांसद और राज्यसभा में 13 में से 2 सांसद यानी कुल 22 सांसद टूट चुके हैं। 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। इस गुट ने ऋतब्रत को अपना नेता बनाया है।
सयानी घोष से जुड़ा विवाद
बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान गाए गए उनके गाने ‘मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना’ के लिए काफी चर्चा और विवाद का सामना करना पड़ा था।इसके अलावा आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले राघव चड्ढा पर सयानी घोष ने एक चुनावी जनसभा के दौरान निशाना साधा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, “मैं चड्ढा नहीं हूं जो ‘चड्डी’ बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा।”