राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली(ब्यूरो)। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन थमा नहीं है। इस बीच दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा- स्वास्थ्य बिगड़ने और डिवीजन बेंच के आदेश के कारण उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया।सरकार की इस कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता। वांगचुक को वहीं दवाएं दी जा रहीं, जिसमें उनकी रजामंदी है। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ पुलिस को 3 दिन में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।

संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार
रविवार को आंदोलन 22वें दिन में प्रवेश कर गया और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्र नेता नेहा, अमीन अमितोज और मनीष कुमार अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे रहे। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा।
तीन छात्र 22वें दिन भी अनशन पर
आयोजकों के अनुसार, जंतर-मंतर पर जारी आमरण अनशन में शामिल तीनों छात्रों की सेहत लगातार गिर रही है।नेहा, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जेएनयू में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज की पीएचडी शोधार्थी हैं। उनका वजन 66 किलोग्राम से घटकर लगभग 58.5 किलोग्राम रह गया है।अमीन अमितोज, डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली में अर्बन स्टडीज के शोधार्थी हैं। उनका वजन करीब 69.3 किलोग्राम से घटकर 60 किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।मनीष कुमार, AISA के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के शोधार्थी हैं। उनका वजन 85.7 किलोग्राम से घटकर लगभग 75.3 किलोग्राम रह गया है।डॉक्टर लगातार तीनों छात्रों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं और उनकी मेडिकल रिपोर्ट पर नजर रखी जा रही है।
वांगचुक को जबरन हटाया गया
छात्र नेता नेहा ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह सादे कपड़ों में कुछ लोग जंतर-मंतर पहुंचे, जिसके कुछ देर बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल वहां पहुंचा और 21वें दिन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने AISA के टेंट में घुसकर बाकी भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को भी हटाने की कोशिश की, लेकिन स्वयंसेवकों के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका।नेहा ने कहा कि यह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन को खत्म करने की कोशिश है। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने और आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।

पत्नी का दावा- अस्पताल में भी जारी है भूख हड़ताल
इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने दावा किया है कि वांगचुक अस्पताल में भी केवल नमक वाला पानी लेकर अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। उन्होंने अस्पताल में भर्ती किए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने केवल स्वास्थ्य की निगरानी करने का निर्देश दिया था।
20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान
आंदोलन का नेतृत्व कर रही Cockroach Janta Party (CJP) ने कहा है कि 20 जुलाई को संसद मार्च हर हाल में निकाला जाएगा। पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके भी दूसरे दिन की भूख हड़ताल पर हैं।CJP ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर बिजली आपूर्ति काट दी गई है और प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस एवं RAF की तैनाती कर आंदोलन को दबाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
JNUTA ने भी जताया समर्थन
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JNUTA) ने भी आंदोलन के समर्थन में बयान जारी करते हुए कथित पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। संगठन ने इसे शिक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों का हिस्सा बताते हुए देशभर के शिक्षकों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील की। हालांकि, संगठन ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आंदोलन के वैकल्पिक तरीकों पर भी विचार करने का आग्रह किया।