*पुलिस की टीम गिरफ्तार करने रवाना
*अपर सत्र जिला न्यायाधीश बैहर ने अग्रिम जमानत किया खारिज
राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। एमबीबीएस की फर्जी डिग्री से 17 वर्षों तक सरकारी नौकरी कर सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने वाला मुन्ना भाई सुनील सिंह उर्फ शिवकुमार पांडे की अग्रिम जमानत अपर सत्र न्यायालय बैहर जिला बालाघाट ने खारिज कर दिया है।

जीवन से खिलवाड़ करता रहा
शासन की तरफ से अपर लोक अभियोजक अशोक वाट ने न्यायालय को बताया कि आरोपी सुनील कुमार उर्फ शिवकुमार पांडे पर किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेजों के प्रयोग कर उक्त कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर शासकीय सेवा (चिकित्सक) पद प्राप्त करने का आरोप है और आरोपी द्वारा वर्ष 2009 से लेकर निरंतर 2026 वर्ष तक चिकित्सक जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य करते रहा है, जो कि चिकित्सक के रूप में कार्य करने में सक्षम ना होते हुए भी उसने उक्त अवधि में चिकित्सा के रूप में काम किया और आम जनमानस के जीवन से खिलवाड़ करता रहा है।

दस्तावेजों की कूट रचना किया
इसके अतिरिक्त उक्त पद को प्राप्त करने के लिए आरोपी सुनील कुमार उर्फ शिवकुमार पांडे द्वारा असत्य शपथ पत्र व किसी अन्य व्यक्ति के शैक्षणिक दस्तावेजों का प्रयोग कर दस्तावेजों की कूट रचना किया है जो कि प्रथम दृष्टया दर्शित दिखाई देता है एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त की गई। सेवा से दीर्घ अवधि तक शासन से नियमित रूप से वेतन प्राप्त कर शासन को आर्थिक नुकसान भी पहुंचा है, इसलिए जमानत निरस्त किया जाना आवश्यक है।
प्रकरण में असत्य रूप से फंसाया
आरोपी के वकील ने भी आरोपी के तरफ से शपथ पत्र प्रस्तुत किया तथा आरोपी के लिए अग्रिम जमानत न्यायालय में प्रस्तुत किया और आरोपी का पक्ष रखते हुए बताया कि उसे प्रकरण में असत्य रूप से फंसाया है और वह कोई अपराध नहीं किया है। वह खंड चिकित्सा अधिकारी बिरसा पर पदस्थ रहकर विगत कई वर्षों से चिकित्सक के रूप में कार्य किया है और इस दौरान किसी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई है और पूरे समर्पण के साथ उसने अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन किया है। आरोपी का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है ना ही उसके फरार होने की संभावना है और ना ही कोई भी साक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगा। वह स्वयं एक मात्र परिवार का आय अर्जनकर्ता है, उसे गिरफ्तार करने से उसकी छवि धूमिल होगी तथा उसके भविष्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
बिहार राज्य का न्याय दृष्टांत
आरोपी के वकील ने प्रकरण में अर्नेश कुमार विरुद्ध बिहार राज्य के न्याय दृष्टांत भी प्रस्तुत किया तथा आरोपी की गिरफ्तारी का बचाव किया जिसका विरोध करते हुए अपर लोक अभियोजक अशोक वाट ने न्यायालय को बताया कि इसे सामान्यत: अग्रिम जमानत का लाभ आपवादिक, दशाओं में ही प्रदान किया जा सकता है। इसलिए अग्रिम जमानत दिया जाना उचित नहीं होगा, जिसे न्यायालय ने मानते हुए आरोपी सुनील कुमार उर्फ शिवकुमार पांडे की अग्रिम जमानत निरस्त की।