राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। रीवा में शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, रीवा में बीएएमएस इंटर्न चिकित्सकों का स्टाइपेंड बढ़ाने सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलन लगातार छठवें दिन भी जारी है। आंदोलनकारी इंटर्न चिकित्सकों ने कॉलेज के मुख्य गेट पर ताला लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। चिकित्सकों की प्रमुख मांग मध्य प्रदेश में मिलने वाले मासिक स्टाइपेंड को अन्य राज्यों के बराबर करने और संबंधित नियमों के अनुरूप संशोधन करने की है।

वेतनमान में समानता की मांग उठाई
आंदोलनकारियों की ओर से प्रस्तुत ज्ञापन के अनुसार, मध्य प्रदेश में बीएएमएस इंटर्न चिकित्सकों को वर्तमान में लगभग 9,383 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। वहीं, ज्ञापन में दूसरे राज्यों में इससे अधिक स्टाइपेंड मिलने का हवाला देते हुए वेतनमान में समानता की मांग उठाई गई है। प्रस्तुत तुलनात्मक आंकड़ों में पश्चिम बंगाल में 33,099 रुपये, ओडिशा में 30,000 रुपये और तेलंगाना में 29,792 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड का उल्लेख है।

दूसरे राज्यों की तुलना में कम राशि मिल रही
इंटर्न चिकित्सकों ने अपनी मांगों के समर्थन में शासन को ज्ञापन भेजकर स्टाइपेंड में वृद्धि, संबंधित नियमों के अनुरूप भुगतान तथा आयुष चिकित्सा संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्टाइपेंड में अंतर के कारण मध्य प्रदेश के इंटर्न चिकित्सकों को दूसरे राज्यों की तुलना में कम राशि मिल रही है।

लगातार छह दिनों से आंदोलन जारी
वहीं, मामले में आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इंटर्न चिकित्सकों की मांगों पर विचार किया जा रहा है और उनकी बात शासन तक पहुंचा दी गई है। हालांकि, मांगों पर अंतिम निर्णय शासन स्तर से लिया जाना है।लगातार छह दिनों से जारी आंदोलन के बीच अब शासन के निर्णय का इंतजार है।

मामला शासन के संज्ञान में है
एक ओर इंटर्न चिकित्सक स्टाइपेंड में वृद्धि और अन्य मांगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि मामला शासन के संज्ञान में लाया जा चुका है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद और शासन स्तर पर समयबद्ध निर्णय इस विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उम्मीद है कि मांगों पर उचित विचार करते हुए ऐसा रास्ता निकलेगा, जिससे इंटर्न चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान हो और कॉलेज की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय सेवाएं भी प्रभावित न हों।