राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। जिले के बैहर विकासखंड का जगला गांव हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर उस समय सुर्खियों में आया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी यहां बीमारियों से मृत बच्चों के परिजनों से मिलने पहुंचे। राहुल गांधी के दौरे के बाद जगला गांव की बदहाल बुनियादी सुविधाएं चर्चा में हैं। सबसे बड़ी समस्या गांव तक पक्की और सुगम सड़क नहीं होने की है।

जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी
जगला गांव पंचायत मुख्यालय नव्ही से महज चार किलोमीटर दूर है, लेकिन कच्चा और पथरीला वनमार्ग होने के कारण ग्रामीणों को हमेशा लंबा सफर ही तय करना पड़ता है। नव्ही पंचायत मुख्यालय से जगला पहुंचने के लिए करीब 18 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों के लिए यह दूरी सिर्फ कागजों का आंकड़ा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी है।

वन विभाग कनेक्टिविटी में रोड़ा
नव्ही पंचायत मुख्यालय से टबलूटोला होते हुए जगला तक करीब 04 किलोमीटर का रास्ता बनाया जा सकता है। जिससे जगला की दूरी काफी कम हो सकती है। जनमन योजना के माध्यम से सड़क निर्माण की संभावना भी बनी थी, लेकिन वन क्षेत्र होने से संबंधित विभाग की अनुमति नही मिली और वन विभाग कनेक्टिविटी में रोड़ा बना गया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में कच्चे रास्ते के कारण बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को आवागमन में परेशानी होती है। आपात स्थिति में अस्पताल या अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जो ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या है।

समस्या का समाधान नहीं हो सका
ग्राम पंचायत के सरपंच मुकेश धुर्वे के अनुसार सड़क निर्माण को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रयास किए गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। वही क्षेत्र के विधायक ने भी वर्ष 2023-24 में उक्त सड़क का प्रपोजल सरकार को भेजा है, लेकिन शासन स्तर से भी स्वीकृति नही मिली। ग्रामीणों का सवाल है कि जब पंचायत मुख्यालय से गांव की सीधी दूरी महज 04 किलोमीटर है, तो फिर वर्षों बाद भी उन्हें 18 किलोमीटर का रास्ता तय करने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है?

18 किलोमीटर का रास्ता
हाल ही के दिनो में राहुल गांधी बालाघाट के जगला गांव के दौरे पर आये थे। जहां उनके सामने ग्रामीणो ने इस समस्या को रखा। क्योकि उन्हें भी जगला पहुंचने के लिये 04 किलोमीटर की सीधी दूरी के बजाय करीब 18 किलोमीटर का रास्ता तय करके गांव पहुंचना पड़ा था। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि रोजाना इसी रास्ते से आने-जाने वाले ग्रामीण किन परिस्थितियों का सामना करते होंगे। अब ग्रामीणों की मांग है कि वन अनुमति की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर नव्ही से टबलूटोला व जगला तक पक्की सड़क निर्माण का रास्ता साफ किया जाए, ताकि गांव को सिर्फ योजनाओं और घोषणाओं में नहीं, बल्कि वास्तव में सुगम सड़क और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा जा सके।