राष्ट्रमत न्यूज बिलासपुर(ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरबा जिले के दीपका स्थित लाइफ केयर अस्पताल से संबंधित 15 साल पुराने अवैध गर्भपात मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के बरी करने के आदेश को आंशिक रूप से बदलते हुए तीन डॉक्टरों को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) कानून के अंतर्गत दोषी ठहराया है। उच्च न्यायालय के इस निर्णय से डेढ़ दशक पुराने प्रकरण में आरोपियों की कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
निचली अदालत ने किया था बरी
इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई कठघोरा के अपर सत्र न्यायालय में हुई थी। प्रकरण की विस्तृत सुनवाई के पश्चात निचली अदालत ने आरोपी डॉ. राजेंद्र प्रसाद रविदास, डॉ. मिथिलेश प्रसाद और रेणु श्रीवास्तव को बरी करने का फैसला सुनाया था। निचली अदालत के इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। राज्य सरकार की याचिका पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया और सुनवाई पूरी की।
इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई कठघोरा के अपर सत्र न्यायालय में हुई थी। प्रकरण की विस्तृत सुनवाई के पश्चात निचली अदालत ने आरोपी डॉ. राजेंद्र प्रसाद रविदास, डॉ. मिथिलेश प्रसाद और रेणु श्रीवास्तव को बरी करने का फैसला सुनाया था। निचली अदालत के इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। राज्य सरकार की याचिका पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया और सुनवाई पूरी की।