कान्हा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में असाधरण हैं ये महिलाएं - rashtrmat.com

कान्हा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में असाधरण हैं ये महिलाएं

राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो)। जंगलों में कार्य करना जोखिम और चुनौतियों से भरा होता है।बालाघाट जिले के बफर कान्हा टाइगर रिजर्व में महिलाएं अपनी साहस, जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा से वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा की मिसाल पेश कर रही हैं। जंगल में गश्त लगाने वाली ये महिलाओं हिम्मत के मामले में असाधारण है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन महिला वन कर्मियों का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है।


बफर जोन में गश्त करती हैं
बफर कान्हा टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर सुश्री अमिता केबी आईएफएस के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में महिला कर्मचारियों की एक टीम पूरी जिम्मेदारी के साथ जंगल की सुरक्षा में लगी रहती हैं। इस टीम में खापा रेंजर सुश्री संध्या देशकर, माना बीट की बीटगार्ड, वनरक्षक सुश्री विनीता मरावी,भैसानघाट बेरियर की वनरक्षक सोनम झारिया तथा सुरक्षा श्रमिक प्रेमा यादव और विमला कुशरे शामिल हैं। ये सभी महिलाएं टाइगर रिजर्व में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखने वन क्षेत्र की निगरानी करने और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही हैं। जंगलों में गश्त करना, बेरियर पर निगरानी रखना और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना उनके रोजमर्रा के कार्यों का हिस्सा है। कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद वे पूरी लगन और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
बालाघाट में पुरुष कम हैं
जंगल में कार्य करना महिलाओं के लिए आसान नहीं होता लेकिन इन महिला कर्मचारियों ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और समर्पण के बल पर कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। ये महिलाएं अपने शासकीय दायित्वों के साथ.साथ पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। विशेष बात यह भी है कि बालाघाट जिला मध्यप्रदेश का ऐसा जिला है जहां स्त्री.पुरुष लिंगानुपात सबसे अधिक है। यहां 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1022 है। यही सकारात्मक सामाजिक वातावरण यहां के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के रूप में दिखाई देता है। बफर कान्हा टाइगर रिजर्व में महिला कर्मचारियों की बढ़ती संख्या भी इसका एक उदाहरण है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन महिला वन कर्मियों की कार्यनिष्ठा और साहस यह संदेश देता है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जंगल की सुरक्षा में जुटी ये महिलाएं वास्तव में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल हैं।

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