डिप्टी CM की रूचि जमीन-भवन की समीक्षा में है कार्यप्रणाली में नहीं -शर्मा - rashtrmat.com

डिप्टी CM की रूचि जमीन-भवन की समीक्षा में है कार्यप्रणाली में नहीं -शर्मा

राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष इजीनियर राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला जब भी रीवा आते हें वो केवल निर्माण कार्यो की समीक्षा करते है। कभी कार्यप्रणाली की समीक्षा नहीं करते। जमीन और भवन से उनका गहरा नाता है। मध्यप्रदेश के किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आज तक नहीं गए यह देखने के लिए वहां की क्या स्थिति है। रीवा में अस्पताल के भवन कितने बन गए। कितनी मशीनें आ गई। इसकी समीक्षा करके वो क्या बताना चाहते हैं,समझ से परे है। राजेन्द्र शुक्ला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। लेकिन उनकी कार्य प्रणाली यही बताती है कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग के प्रति कोई रूचि नहीं है।

32 बच्चों की मौत,डिप्टी सीएम जागे नहीं
राष्ट्रमत से एक चर्चा के दौरान जिला गा्रमीण कांग्रेस अध्यक्ष इंजीनियर राजेन्द्र शर्मा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि बलाघाट जिले के आदिवासी अंचल बिरसा 32 आदिवासी बच्चे बीमारी से मर गए। लेकिन डिप्टी सीएम यानी स्वास्थ्य मंत्री को कोई फर्क नहीं पड़। वहां बच्चों की मौत पर किसी को दोषी नहीं माना मलेरिया इंस्पेक्टर का ताबादला करके चले आए। वो वहां इसलिए गए कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आने वाले थे। राहुल गांधी ने वहां जमीनी सच्चाई देखा। सरकार वहां है ही नहीं। जाहिर सी बात है कि वो लोकसभा में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला उठाएंगे।सरकार की खामियांे पर बाते करेंगे।


अस्पतालों में अमानक दवाएं
एक सवाल के जवाब में इंजीनियर शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ही नहीं पूरी बीजेपी 24 घंटे सिर्फ विकास की बात करती है,लेकिन सच्चाई यह है कि विकास की आड़ में 24 घंटे केवल भ्रष्टाचार ही करते हैं। रीवा का एक भी काम बता दें बीजेपी वाले की इसमें भ्रष्टाचार नहीं किया है। स्वास्थ्य विभाग में खरीदी गई सात सौ करोड़ की दवा में भ्रष्टाचार हुआ। अमानक दवा पूरे प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों मिल रही है। बालाघाट में सीएचएमओ ने स्वीकारा कि अमानक दवाएं मरीजों को दी जा रही है। इट्रेवैगन कैप्सूल अमानक है। रीवा में अमानक इंजेक्शन लगाने से कई गर्भवती महिलाओं की याददाश्त चली गयी।


रीवा का स्वास्थ्य विभाग बीमार है
रीवा स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला है। यहां का स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार है। संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा कांड को नहीं भुलाया जा सकता। बीमारी कुछ और दवा कुछ और दी जा रही है। आए दिन संजय गांधी अस्पताल में मरीजों के साथ मारपीट और अव्यवस्था की खबरें आती रहती है,इस पर स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान नहीं जाता। ध्यान जाता है तो केवल निर्माण कार्यो की समीक्षा पर। सवाल यह है कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की और जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने से क्यों डरते हैं। जाहिर है कि उनके विभाग की पोल कुछ ज्यादा ही खुल जाएगी। हैरानी होती है,कंक्रीट सड़क पर डामर बिछाने की कौन सी इंजीनियरिंग है,यह बात रीवा की जनता को उन्हें बताना चाहिए।रीवा में सुगम सड़कें नहीं है और डिप्टी सीएम कहते हैं रीवा की सुगम सड़कों पर सफर करिये।

इस सरकार में जान की कीमत नहीं
बीजेपी सरकार में लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है। इंदौर में सीवर और जहरीले पानी से 35 मौत,छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप से 27 बच्चों की मौत। सागर में जहरीली शराब से 25 मौत।बच्चों के लिए पैरासिटामोल सिरप पर प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन इसकी बिक्री पर कोई रोक नहीं। स्वास्थ्य विभाग नकारा हो गया है। जिले में नशा मुक्ति पखवाड़ा डिप्टी सीएम बड़े जोश से मनाते दिखते हैं,जबकि उनका ही जिला कोरेक्स मुक्त नहीं है।नशे का संभागीय मुख्यालय रीवा बन गया है। हैरानी वाली बात है कि जिस जहरीली सिरप से 27 बच्चे मरे उस थोक विक्रेता राजेश सोनी को 11 महीने बाद जमानत मिल जाती है।


पचास फीसदी मरीज नागपुर क्यों जा रहें
संजय गांधी अस्पताल हो या फिर जिला अस्पताल। अव्यवस्था के सिवा कुछ नहीं है। जिला अस्पताल में गायनी विभाग सिर्फ दो डाॅक्टर के भरोसे। यहां सोनी ग्राफी महिलाओं की होती नहीं। वो संजय गांधी आएं फिर प्राइवेट कराएं। डिप्टी सीएम दावा करते हैं मुंबई जैसी स्वास्थ्य सेवाएं रीवा वालों को मिल रही है,ऐसा है तो फिर 50 फीसदी मरीज नागपुर क्यों जा रहे हैं।


ये दाग बीजेपी नहीं धो सकती
इंजीनियर राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी जब से बालाघाट का दौरा किये है डिप्टी सीएम अंदर से घबराए हुए है। इसलिए कि प्रदेश में आदिवासियों की आबादी 21 फीसदी है। हर पांचवा व्यक्ति आदिवासी है। प्रदेश की 230 सीटों में 47 सीट आरक्षित है।इसके अलावा 37 और सीटें हैं जिन पर आदिवासियों के वोटों का असर माना जाता है। यानी कुल 84 सीटें हैं।इस बार आदिवासी वोटर का झुकाव कांग्रेस की ओर है।आदिवासी बच्चों की मौत का मामला हो या फिर जहरीली सिरप से बच्चों की मौत,ये ऐसे दाग है कि डिप्टी सीएम का स्वास्थ्य विभाग नहीं धो सकता।इनके पास ऐसी कोई वाशिंग मशीन नहीं है जिससे ये दाग धो सकेंगे।
डिप्टी सीएम घबराए हुए हैं
डिप्टी सीएम अंदर से घबराए हुए हैं यदि आदिवासी क्षेत्र से 2018 के चुनाव से भी कम सीटें आई तो पार्टी के अंदर उनकी सियासी छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इन दिनों जिस तेजी से सोशल मीडिया में बीजेपी सरकार के काले कारनामे,मोदी,ज्ञानेश कुमार,गडकरी,मोहन यादव और राजेन्द्र शुक्ला का विरोध हो रहा है,वो आने वाली एक नई राजनीति का संकेत है।

(जैसा इंजीनियर राजेन्द्र शर्मा ने रमेश कुमार ‘रिपु’ से कहा)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *