वनग्राम बोदलझोला में विकास अंकुरित नहीं हुआ,अब भी आंगनबाड़ी झोपड़ी में - rashtrmat.com

वनग्राम बोदलझोला में विकास अंकुरित नहीं हुआ,अब भी आंगनबाड़ी झोपड़ी में

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।जिले के आदिवासी बाहुल्य गांवों की बदतर स्थिति पहले से भी बदतर हो गयी हैं। खस्ताहाल बुनियादी ढांचे ने सवाल खड़े कर दिये हैं कि जिले मे प्रशासन है। कलेक्टर है। पूरा प्रशासनिक अमला है,बावजूद इसके आदिवासी गांवों में विकास अकुरित नहीं हुआ है। बात किरनापुर विकासखंड के तहत बक्कर ग्राम पंचायत के अधीन वनग्राम बोदलझोला की है। यह आदिवासी बाहुल्य गांव है। यहां की आबादी करीब 200 हैं।


गांव बने नरक
इस गांव में शिक्षा,पोषण और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।इस गांव में आंगनबाड़ी का अपना कोई भवन नहीं है।प्राथमिक स्कूल है लेकिन नौनिहालों के लिए कच्ची झोपड़ी में आंगनवाडी संचालित की जा रही है।जिस दिन तेज बारिश होती है,उस दिन यह झोपड़ी भी टकपने लगी है। जिससे बच्चों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को मानो सिकुडकर रहने को मजबूर होना पड़ता है।
बारिश हुई आंगन बाड़ी बंद
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता राधिका टेकाम ने बताया कि केंद्र में 16 से 20 बच्चों का पंजीयन है, लेकिन बारिश शुरू होते ही झोपड़ी से पानी टपकने लगता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को बैठाना मुश्किल हो जाता है। कई बार मजबूरी में आंगनवाड़ी बंद करनी पड़ती है। जिससे बच्चों के पोषण आहार और प्रारंभिक शिक्षा पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्थायी भवन नहीं होने के कारण वर्षों से कठिन परिस्थितियों में कार्य करना पड़ रहा है।
पन्द्रह वर्षो से झोपड़ी में आंगनबाड़ी
ग्रामीण तिलकसिंह भलावी ने बताया कि वर्ष 2011 से उनके निजी झोपड़ीनुमा मकान में ही आंगनवाड़ी संचालित हो रही है। उन्होंने कई बार शासन.प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नए भवन की मांग की,लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। लेकिन अब सब्र का बांध टूट रहा है। यदि अब भी नये भवन की स्वीकृति नही मिलेगी तो समझा जायेगा कि संबंधित विभाग और सरकारी सिस्टम अपनी नैतिक जिम्मेंदारी से दूर भाग रहा है।
बुनियादी सुविधाएं नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि उनका बोदलझोला गांव केवल आंगनवाड़ी भवन की समस्या से ही नहीं जूझ रहा बल्कि गांव में अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी टोटा है। बारिश में सड़क नहीं होने से आवागमन ठप हो जाता है।ग्रामीणों को छोटी.छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। रोजगार के सीमित साधन, पेयजल और अन्य विकास कार्यों की कमी भी ग्रामीणों की प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं।
आंगन बाड़ी भवन के निर्देश दिये हैं-मीणा
इस संबंध में कलेक्टर मृणाल मीणा ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित विभाग को निर्देशित कर दिया गया है कि आंगनवाड़ी भवन के निर्माण के लिए आवश्यक कार्रवाई और प्रयास किए जाएं। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि कठिनाईयों भरे जीवन से एक दिन निजात जरूर मिलेगी।

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