राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। शहर की वर्षों पुरानी जल प्रदूषण की समस्या को दूर करने 35 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा। एसटीपी योजना की मंजूरी मिल गयी है। अब नदी तालाबों में घरों का गंदा पानी नहीं जाएगा।18 माह में इस परियोजना को पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है।हालांकि योजना के लिए आवश्यक भूमि आवंटन में हो रही देरी के कारण कार्य अभी प्रारंभ नहीं हुआ है।

यहां होंगी सीवेज ट्रीटमेंट इकाइयां
नगर पालिका प्रशासन के अनुसार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी के दिशा.निदेर्शों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य शहर के सीवेज जल का वैज्ञानिक उपचार कर उसे पुनः उपयोग योग्य बनाना है। इसके अलावा प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना है। प्रस्तावित योजना के तहत शहर के चार प्रमुख क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट इकाइयां स्थापित की जानी हैं। इनमें एएचपी क्वार्टर, समता तालाब, कोसमी और मोती नगर शामिल हैं। इन स्थानों का चयन जल निकासी तंत्र, जनसंख्या घनत्व और सीवेज प्रवाह के आधार पर किया गया है।
भूमि आवंटन नहीं हुआ
इनमें से दो स्थानों पर भूमि आवंटन की प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हो सकी है। जिसके कारण निविदा प्रक्रिया और निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। नगर पालिका प्रशासन संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर इस समस्या के समाधान का प्रयास कर रहा है।
बीमारी से निजात मिलेगा
वर्तमान में बड़ी मात्रा में घरेलू अपशिष्ट जल सीधे तालाबों और नालों में पहुंच जा रहा है। जिससे जल प्रदूषण बढ़ा है। एसटीपी के संचालन से समता तालाब सहित अन्य जल स्रोतों की गुणवत्ता में सुधार होगा। उपचारित जल के पुनर्भरण से भूमिगत जल स्त्रोतों पर दबाव कम होगा। भू.जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। वही दूषित जल के कारण फैलने वाले जलजनित रोगों जैसे डायरिया, टाइफाइड और त्वचा संक्रमण के मामलों में कमी आने की संभावना है।
18 महीने में परियोजना पूरी होगी
नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी सीएमओ के अनुसार भूमि आवंटन के लिए संबंधित विभागों से चर्चा की जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए और लगभग 18 महीनों के भीतर परियोजना पूरी हो जाए।
तो लागत बढ़ जाएगी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सीवेज परियोजना की सफलता केवल निर्माण पर नहीं बल्कि उसके संचालन और रखरखाव पर भी निर्भर करती है। वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती जमीन उपलब्ध कराना है। यदि यह प्रक्रिया लंबी खिंचती है तो परियोजना की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं। एसटीपी को संचालित करने के लिए नियमित बिजली, प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ और उपकरणों के रखरखाव की आवश्यकता होती है।जिससे वार्षिक खर्च बढ़ता है। उपचार प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले स्लज का वैज्ञानिक निस्तारण आवश्यक होगा।