राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)।. मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से शासन की विभिन्न
योजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले बाढ़ राहत तथा आपदा प्रबंधन की समीक्षा कर लें। अतिवृष्टि की स्थिति में राहत शिविर बनाने तथा बाढ़ से राहत और बचाव के सभी प्रबंध कर लें। किसी भी स्थिति में जन-
धन की हानि न्यूनतम रखने का प्रयास करें।

असयम मौतों को रोका जा सकता है
मुख्य सचिव ने कहा कि जिला सड़क सुरक्षा समिति की हर माह बैठक आयोजित करके यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं। सड़कों से ब्लैक स्पाट कम करने और दोपहिया वाहन में हेलमेट की अनिवार्यता से ही बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली असयम मौतों को रोका जा सकता है। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष के 9 महीनों में सड़क दुर्घटना तथा होने वाली मौत में कमी आई है। ई डॉर पोर्टल पर दुर्घटना की जानकारी तत्काल दर्ज कराएं। दुर्घटना होने पर प्रधानमंत्री राहत योजना से पीड़ितों को उपचार की नि:शुल्क सुविधा दें। राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं। दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मदद देकर हम उनकी जान बचाने का पुण्य कार्य करते हैं। कलेक्टर्स खनिज पदार्थों के अवैध उत्खनन और परिवहन पर कड़ी कार्रवाई करें। इन पर लगाए गए जुर्माने की राशि की कठोरता से वसूली करें।
मछलीपालन का विकास हो रहा
मुख्य सचिव ने कहा कि कलेक्टर्स खेती तथा उससे जुड़े विभागों की गतिविधियों की नियमित समीक्षा करें।मध्यप्रदेश की जीएसडीपी में खेती का योगदान पिछले 10 सालों में बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया है। खेती के साथ-साथ पशुपालन और मछलीपालन का भी तेजी से विकास हो रहा है। मछलीपालन की केजकल्चर योजना में एक लाख 70 हजार से अधिक आवेदन पत्र मिले हैं। मछलीपालन बढ़ने के साथ-साथ इनके विपणन और सुरक्षित भण्डारण की भी व्यवस्था कराएं। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मुख्य रूप से खेती पर ही आधारित हैं।
गेंहू की राशि का भुगतान कराएं
मुख्य सचिव ने कहा कि गेंहू का उपार्जन लगभग पूरा हो गया है। प्रदेश में 101 लाख मीट्रिक टन से अधिक उपार्जन हुआ है। उपार्जित गेंहू का तत्काल परिवहन कराकर सुरक्षित भण्डारण कराएं। किसानों को 5 जून तक उपार्जित गेंहू की राशि का शत-प्रतिशत भुगतान कराएं।स्वरोजगारयोजनाओं के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों का निर्माण कराएं जिससे स्वरोजगार के अवसर मिलने के साथ-साथ किसानों को उनके उत्पादों के अच्छे दाम मिलें। खाद वितरण के लिए सभी जिलों में ई विकास सिस्टम लागू कर दिया गया है। अब केवल ई टोकन के माध्यम से ही खाद का वितरण कराएं।