राम मंदिर चढ़ावा चोरी : FIR में देरी, SC की निगरानी में जांच की जाए - rashtrmat.com

राम मंदिर चढ़ावा चोरी : FIR में देरी, SC की निगरानी में जांच की जाए

 राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली(ब्यूरो)। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल ने आज गुरुवार 2 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिट्ठी लिखी है। केसी वेणुगोपाल ने इस मामले की तुरंत सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में लिखा, ‘इतनी बड़ी धोखाधड़ी, जिसमें सैकड़ों करोड़ रुपये के आरोप शामिल हैं, हिंदू आस्था, धर्म और जीवन जीने के तरीके के साथ बड़ा धोखा है।’

हेराफेरी के चौंकाने वाले खुलासों की जांच हो

कांग्रेस के ऑर्गनाइजेशन इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी ने लिखा, ‘भगवान राम न्याय और नेकी के प्रतीक माने जाते हैं। इस तरह के आरोपों को बिना किसी भेदभाव के जांच करने के बजाय दबा देना उनके भक्तों और उनके मूल्यों के साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा।’संसद की अहम पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के हेड केसी वेणुगोपाल ने लिखा, ‘मैं आपको अयोध्या में राम मंदिर में बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल फ्रॉड, चोरी और दान में हेराफेरी के चौंकाने वाले खुलासों पर लाखों भारतीयों के गहरे दुख और गुस्से को बताने के लिए लिख रहा हूं।’केसी वेणुगोपाल ने चिट्ठी में आगे लिखा, ‘आम नागरिकों ने जो चढ़ावा दिया था, जिन्होंने भगवान राम के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा से अपनी जिंदगी भर की मेहनत की कमाई दी थी, उसे बेशर्मी से लूटा गया है, जिससे लाखों लोगों के लिए पवित्र मानी जाने वाली जगह की पवित्रता पर चोट पहुंची है।’

SIT न  काबिल है और न ही इंस्टीट्यूशनल

वेणुगोपाल ने पीएम मोदी को आगे बताते हुए लिखा, ‘राज्य की बनाई SIT न तो इतने काबिल है और न ही इंस्टीट्यूशनल तौर पर आजाद है कि वह उन लोगों की जांच कर सके जिनका बहुत ज्यादा पॉलिटिकल और इंस्टीट्यूशनल असर है।’कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, ‘इस बात का डर बढ़ रहा है कि जांच का इस्तेमाल बाकी सबूत मिटाने के लिए किया जा रहा है और उन बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है जिन्होंने इस करोड़ों के गबन को अंजाम दिया था।’वेणुगोपाल ने लिखा, ‘इस स्कैंडल के लिए सबसे ज्यादा जवाबदेही तय होनी चाहिए क्योंकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक पब्लिक ट्रस्ट है जिसे भारत सरकार ने 2020 में बनाया था। इसे बनाना ही सरकार की सीधी निगरानी में हुआ था और जमीन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक ट्रस्ट को दी गई थी।’