राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट के धार्मिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि भगवान राम की झांकी दशहरा स्थल पर पहुंची नहीं और रावण जल गया। आयोजकों की लापरवाही के चलते ऐसा हुआ। लोग सन्न रहे गये कि यह कैसे हो गया। आतिशबाजी की एक चिंगारी रावण के पुतले पर गिरी और देखते देखते पटाखे फूटने लगे और रावण का पुतला जल कर खाक हो गया।

एक चिंगारी रावण के पुतले में लगी
दशहरा पर्व पर हमे अक्सर यही प्रथा देखने मिली है कि बालाघाट में पानीपत की तर्ज पर हनुमान जी का स्वरूप धारण करने वाले साधक 40 किलो का भारी-भरकम मुकुट पहनकर शोभायात्रा की अगुवाई करते हैं। वे भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर दशहरा मैदान पहुंचते हैं, जहां रावण की परिक्रमा के बाद श्रीराम के बाण से दहन होता है। लेकिन इस बार पुतला दहन से पहले मैदान में शानदार आतिशबाजी की जा रही थी। इसी आतिशबाजी की एक चिंगारी रावण के पुतले में लगी पराली पर जा गिरी और देखते ही देखते पुतले में लगे पटाखे फटने लगे और श्रीराम के आने से पहले ही रावण का पुतला राख में तब्दील हो गया।
आयोजन समिति की गंभीर लापरवाही
इस घटना से ना सिर्फ धार्मिक भावना आहत हुई है बल्कि बयानबाजी भी शुरू हो गई है। शहर के प्रतिष्ठित और राजनैतिक दलो से जुडे लोगो ने इसे आयोजन समिति की गंभीर लापरवाही बताई तो वही समिति पदाधिकारियों ने इसे अनजाने में हुई बडी गलती बताया। आतिशबाजी के दौरान हुआ यह हादसा व्यवस्था की बड़ी चूक तो है, लेकिन भविष्य में इस तरह की घटना न हो, इसका विशेष ध्यान रखने की आवश्यक्ता जरूर महसूस हुई है।