राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रट्टा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामले में राजस्व विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। मंगलवार, 21 अक्टूबर को प्रशासन ने जेसीबी की मदद से करीब 5 एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। इस जमीन की अनुमानित कीमत 25 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। लंबे समय से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई पर खुशी जाहिर की।

अतिक्रमण का प्रकरण दर्ज
जानकारी के अनुसार, बालाघाट तहसील के पटवारी हल्का नंबर 17/42 में रट्टा निवासी रूमनलाल और जियालाल दमाहे द्वारा बड़े झाड़ के जंगल तथा आबादी मद की सरकारी भूमि पर कथित रूप से अतिक्रमण कर खेती की जा रही थी। इस संबंध में ग्रामीणों ने तहसील से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायतें की थीं। ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर तहसील न्यायालय में अतिक्रमण का प्रकरण दर्ज किया गया। संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद कब्जा नहीं हटाए जाने पर प्रशासन ने कार्रवाई की।
5 एकड़ सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त
नायब तहसीलदार मंजुला मोहबिया, राजस्व निरीक्षक हितेंद्र सिंह मर्सकोले तथा भरवेली थाना प्रभारी भूपेंद्र पन्द्रो सहित राजस्व और पुलिस विभाग का अमला गांव पहुंचा। इसके बाद जेसीबी मशीन की मदद से सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई, जो शाम करीब 6 बजे तक चली। राजस्व विभाग के अनुसार, कार्रवाई के बाद लगभग 5 एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इस दौरान ग्राम पंचायत सरपंच रवि कुमरे, उपसरपंच जितेंद्र राणा सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले यामने 27 सिंतबर को दमाहे परिवार और ग्रामीणों के बीच विवाद एवं झड़प की घटना सामने आई थी। जहां घटना के दौरान लाठी-डंडे चलने, कई लोगों के घायल होने और वाहनों व मशीनों में तोड़फोड़ की तस्वीरे सामने आई थी। वही घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने तथा मामले की जांच की कार्रवाई की। उस समय गांव में तनाव की स्थिति बनने पर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी और गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। ग्रामीणों ने दमाहे परिवार पर अवैध कारोबार और दबंगई करने के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। उनका आरोप था कि विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ मारपीट की जाती है। इसी विवाद के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग की थी।