जिन्दगी का किलर है न्यूक्लिर प्लांट-बबीता,काग्रेस का 24 से डेरा डालो घेरा डालो - rashtrmat.com

जिन्दगी का किलर है न्यूक्लिर प्लांट-बबीता,काग्रेस का 24 से डेरा डालो घेरा डालो

राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो) पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बबीता साकेत ने कहा न्यूक्लिर प्लांट के विरोध में “डेरा डालो,घेरा डालो” का दो दिवसीय धरना प्रदर्शन 24 अक्टूबर से कांग्रेस करेगी।  आद्योगिक विकास के बहाने रझौही गांव के एससी एसटी लोगों की जिन्दगी बेबस करना चाहती है बीजेपी सरकार। कांग्रेस जिन्दगी के साथ खिलावाड़ नहीं करने देगी। न्यूक्लिर प्लांट ग्रमीणों की जिन्दगी का किलर है।

यह बात पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बबीता साकेत ने कही । उन्होने कहा कि कांग्रेस इसे आद्योगिक विकास नहीं बल्कि बीमारी का न्यौता मानती है। जर्मनी जैसे विकसित देश में तीन न्यूक्लिर प्लांट बंद कर दिये गए। अभी तक प्रदेश में कहीं भी परमाणु ऊर्जा के प्लांट नहीं लगे हैं। इस प्लांट के लगने से दस गांवों के लोगों को केंसर जैसी घातक बीमारी का सामना करना पड़ेगा कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी।


जहां आबादी नहीं है वहां न्यूक्लिर प्लांट लगाएं
यह बात पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बबीता साकेत ने राष्ट्रमत से कही। उन्होंने कहा कि जमीन और गांव चला गया न्यूक्लिर प्लांट की वजह से तो आने वाली पीढ़ी के पास कुछ नहीं बचेगा।प्रस्तावित टाटा पावर परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर रोझौही, सरई कलां समेत आसपास के दस गांवों में इसका विरोध हो रहा है। इस प्रोजेक्ट का असर आधा सैकड़ा से अधिक गांवों तक हो सकता है। विरोध सिर्फ जमीन का नहीं है। खेती,पानी, घर और आने वाली पीढ़ियों का है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वो इस प्रोजेक्ट को वहां लगाए जहां अबादी नहीं है।


बगैर सहमति के भूमि अधिग्रहण गलत
बबीता साकेत ने कहा लोगों की जिन्दगी केा नारकीय न बने इसलिए पूर्व में कंाग्रेस सरकार ने फैसला किया था कि किसान और ग्रामीणों की सहमति के बगैर भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।बीजेपी सरकार उन अधिनियमों को दरकिनार करते हुए रझौही में परमाणु सयंत्र लगाने जा रही है।इस प्लांट के लगने से आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा और कैंसर जैसी घातक बीमारियों के होने का खतरा मंडरा रहा है।


जानेलवा प्रोजेक्ट है न्यूक्लिर प्लांट
जिला कंाग्रेस संगठन के सचिव रवि तिवारी ने कहा कि क्षेत्रवासियों के व्यापक विरोध के बाद भी प्रशासन इस जानलेवा प्रोजेक्ट को स्थापित करना चाहती है। कांगे्रस को औद्योगिक विकास से परहेज नहीं है। लेकिन ऐसा प्रोजेक्ट किस काम का जो जानलेवा हो। कांग्रेस पार्टी प्रशासन के इस अन्यायपूर्ण कदम का जिससे पूरे क्षेत्रवासियों की जिन्दगी के लिए जहर है। उसका पुरजोर विरोध करती है। क्षेत्र के हित के लिए कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। इस प्लांट को स्थापित न किए जाने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी दिनांक 24 व 25 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय धरना प्रदर्शन करने का निश्चय किया है। यदि प्रशासन ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी और जबरन न्यूक्लियर प्लांट स्थापित कराने का दुस्साहस किया तो कांग्रेस पार्टी जनमानस एवं किसानों के साथ होने वाले अत्याचार को निर्णायक स्तर तक संघर्ष कर प्लाट स्थापित करने का पुरजोर विरोध करेगी।


प्रभावित परिवार की सहमति जरूरी
रवि तिवारी ने कहा कि किसी भी प्लांट के लिए यदि जमीन अधिग्रहित किया जा रहा है तो कम से कम 80 फीसदी परिवार की सहमति जरूरी है। यदि पीपीपपी परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन की स्थिति में कम से कम 70 फीसदी प्रभावित परिवार की सहमति जरूरी है।इसी तरह अनुसूची क्षेत्र में यानी अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में अधिनियम की धारा 41 के तहत अर्जन की प्रक्रिया शुरू करने पहले संबंधित ग्राम सभा या फिर पंचायत की सहमति और परामर्श आवश्यक है।लेकिन देखा जा रहा है कि बगैर ग्राम सभा की सहमति के न्यूक्लिर प्लांट लगाया जा रहा है। जबकि जितने भी गांव प्रभावित होने वो सबके सब इसका विरोध कर रहे हैं।

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