बिहार की सत्ता में पीके चाबी बनने की सियासत कर रहे - rashtrmat.com

बिहार की सत्ता में पीके चाबी बनने की सियासत कर रहे

राष्ट्रमत न्यूज,पटना/नईदिल्ली(ब्यूरो)। देश में कहीं भी चुनाव नहीं है। इसलिए बिहार का चुनाव दिलचस्प रहेगा। जनसुराज पार्टी सभी राष्ट्रीय पार्टी के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है। बिहार की सत्ता में पीके चाबी बनने की सियासत करने की चाह में टिकट बांटे हैं। पूरी योजना के आधार पर बिहार में सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं। अब देखना होगा कि उनके हक में बिहार का वोटर कितना पलटता है।


दलबदलुओं के दम पर PK
वैसे पीके दलबदलुओं के दम पर बिहार से राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं। बीजेपी छोड़कर आए 17 उम्मीदवार जनसुराज के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे। जनसुराज की जारी के सूची में 65 कैंडिडेट्स में 1 क्रिमिनल 7 वकील, 17 दलबदलू, 4 इंजीनियर और 9 डाॅक्टर शामिल हैं। इसके अलावा बीजेपी के कद्दावर नेता और बक्सर के 4 बार के सांसद रहे लालमुनि  के बेटे हेमंत चैबे को चैनपुर से टिकट मिला है। इस बार बिहार में सीधी सियासी लड़ाई एनडीए और महागठबंधन में है सी मगर जनसुराज और ओवैसी की पार्टी वोट बैंक को प्रभावित करेंगे। जनसुराज ने बिहार की जातिय गणित के मुताबिक प्रत्याशी खड़े कर रही है। जाहिर सी बात है जनसुराज की आहट एनडीए और महागठबंधन को भारी पड़ सकती है।
नीतीश की पार्टी में फूट
नीतीश कुमार के भरोसेमंद जदयू नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दसई चैधरी को पातेपुर से जबकि 4 बार के कांग्रेस के विधायक रहे सत्येंद्र हाजरा को सोनवर्षा से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं माले के एरिया कमांडर सत्येंद्र सहनी को तरैया से प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरेंगे।ये पीके के चुने हुए कैंडिडेट हैं जो जनसुराज के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे।इससे पहले जनसुराज ने 51 कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की थी। पार्टी की ओर से अबतक 116 उम्मीदवारों के नाम फाइनल हो चुके हैं।


दूसरी लिस्ट में 17 दलबदलू
प्रशांत किशोर ने जनसुराज के कैंडिडेट की दूसरी लिस्ट सोमवार को जारी की। इस लिस्ट में उन्होंने राज्य के 30 जिलों की 65 विधानसभा के लिए कैंडिडेट के नाम की घोषणा की। जबकि पहली लिस्ट में 51 विधानसभा के लिए कैंडिडेट की घोषणा की थी।पहली लिस्ट में जहां प्रशांत किशोर ने फ्रेश चेहरों को मैदान उतारा था। तो वहीं दूसरी लिस्ट में दल-बदलुओं को जगह दी गई है। इन 65 उम्मीदवारों में 17 ऐसे कैंडिडेट हैं जो बीजेपीए राजद और माले में रहकर राजनीति करते रहे हैं।
जेल जाने वाले को भी टिकट
जनसुराज की लिस्ट में एक नाम ऐसा भी है जिसपर अटेम्ट ऑफ मर्डर का भी आरोप है। 47 साल के नाज अहमद इस मामले में जेल भी जा चुके हैं। उन्हें पार्टी की तरफ से मोतिहारी के केसरिया से कैंडिडेट बनाया गया है।नाज लगभग 6 महीने से भी ज्यादा जेल में रहने के बाद इसी साल जेल से जमानत पर बाहर आए हैं। इलाके के लोगों की मानें तो पहले भी इन पर कई तरह के क्रिमिनल मामले दर्ज हैं।


मुस्लिमों पर दांव
दूसरी लिस्ट में प्रशांत किशोर ने पिछड़ा और मुस्लिम पर दांव लगाया है। 65 की लिस्ट में इन्होंने 24 पिछड़ी जाति के नेताओं को कैंडिडेट बनाया है। इनमें 14 ईबीसी और 10 ओबीसी के हैं। यानी 37 फीसदी पिछड़ी जाति को टिकट दिया गया है। जबकि 14 मुस्लिम कैंडिडेट यानी कि 21 प्रतिशत मुस्लिम कैंडिडेट को टिकट दिया गया है। जबकि 11 सवर्ण और 1 एसटी को टिकट दिया गाया है।
EBCऔर OBC को साधाना है
वहीं पहली लिस्ट में पीके ने 51 कैंडिडेट में से 17 यानि की 33.3फीसदी अति दलित ईबीसी को 11 यानी कि 21.5फीसदी पिछड़ा को 7 यानी कि 13.7फीसदी मुस्लिम को 9 यानी कि 17.7 फीसदी को 7 यानी कि 13.7 एससीएसटी को कैंडिडेट बनाया था।
इस हिसाब से देखें तो कैंडिडेट के सिलेक्शन में प्रशांत किशोर की पूरी कोशिश जातियों को साधने की है। उनका सबसे ज्यादा फोकस राज्य में सबसे बड़ी आबादी ईबीसी और ओबीसी को साधने की है।अगर दोनों लिस्ट को मिला लें तो 52 कैंडिडेट इन्होंने पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग से बनाए हैं। इस हिसाब से देखें तो 116 कैंडिडेट में से 45 प्रतिशत कैंडिडेट इनके पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के हैं।
नीतीश का वोट बैंक
राज्य में ईबीसी की आबादी 36ः और व्ठब् की आबादी 27 प्रतिशत है। यानि इस लिहाज से देखें तो राज्य में अकेले 63फीसदी आबादी इनकी है। मुख्य तौर पर इन्हें नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक माना जाता है।

महागठबंधन का वोट बैंक
EBCऔर OBC के बाद संख्या के लिहाज से प्रशांत किशोर ने मुस्लिमों को सबसे ज्यादा हिस्सेदारी दी है। पहली लिस्ट में जनसुराज की तरफ से 7 और दूसरी लिस्ट में 14 यानी कि 21 मुस्लिम कैंडिडेट बनाए गए हैं।इस हिसाब से देखें तो प्रशांत किशोर ने कैंडिडेट की लिस्ट में 18 प्रतिशत की हिस्सेदारी दी है। राज्य में मुस्लिमों की कुल आबादी लगभग 19 फीसदी है। इसे मुख्य रूप से महागठबंधन का वोट बैंक माना जाता है। PK जिस तरह टिकट बांटे हैं,यह माना जा रहा है कि वो बिहार की राजनीति की तस्वीर बदलने का सियासी जाल बिछाए हैं।

 

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