पंच-सरपंच चुनावः फर्श से अर्श तक पहुंचने की सियासत शुरू - rashtrmat.com

पंच-सरपंच चुनावः फर्श से अर्श तक पहुंचने की सियासत शुरू

राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो)। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन 2026 (पूर्वाद्ध) की घोषणा 31 अगस्त को की गई है। जिले में पंचायतों के रिक्त पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। जिले में कुल पांच सरपंच पद तथा 46 पंच पद रिक्त हैं, जिनके लिए 29 सितंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा।

रिक्त 46 पंच पदों के लिए निर्वाचन

जिले में जनपद पंचायत खैरलांजी के क्षेत्र क्रमांक-19 में जनपद पंचायत सदस्य पद के लिए भी उप निर्वाचन होना है। इसके अलावा जनपद पंचायत बालाघाट की ग्राम पंचायत भरवेली, जनपद पंचायत लांजी की ग्राम पंचायत परसोडी, जनपद पंचायत लालबर्रा की ग्राम पंचायत खुरपुडी, जनपद पंचायत वारासिवनी की ग्राम पंचायत ऐकोडी तथा जनपद पंचायत परसवाड़ा की ग्राम पंचायत झांगुल में सरपंच पद रिक्त हैं। इन पदों के साथ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में रिक्त 46 पंच पदों के लिए भी निर्वाचन होगा।

चर्चित भरवेली ग्राम पंचायत
हमेशा विवादों में रहने वाली  चर्चित भरवेली ग्राम पंचायत में एक बार फिर राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। 20 वार्डो से बनी लगभग 7530 मतदाताओं वाली इस पंचायत में रिक्त सरपंच सीट पर हो रहे उपचुनाव को आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की दिशा तय करने वाला लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।  चुनाव परिणाम 3 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।  भरवेली पंचायत का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व सरपंच गीता अनिल बिसेन के कार्यकाल के दौरान दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। पहले प्रस्ताव में वे अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रही थीं, लेकिन दूसरे अविश्वास प्रस्ताव के दौरान 16 पंच उनके खिलाफ खड़े हो गए, जिसके बाद उन्हें सरपंच पद गंवाना पड़ा था।

साख वापसी की कोशिश कर रही

अब एक बार फिर वे चुनावी समर में उतरकर अपनी साख वापसी की कोशिश कर रही हैं। वैसे तो चुनावी मैदान में कुल 5 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन जमीनी समीकरणों पर नजर डालें तो मुख्य मुकाबला पूर्व सरपंच गीता अनिल बिसेन और कल्पना वासनिक के बीच नजर आ रहा है। यहां चुनावी गलियारों में हो रही चचार्ओं के मुताबिक, पूर्व में सरपंच रहने के कारण मिले प्रशासनिक व विकास कार्यों के अनुभव की वजह से गीता बिसेन का पलड़ा भारी दिख रहा है। तमाम राजनीतिक दलों और स्थानीय ग्रामीणों की निगाहें इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव पर टिकी हैं।

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