NGT के आदेश की आवमानना पर बालाघाट कलेक्टर सहित नौ लोगों को नोटिस - rashtrmat.com

NGT के आदेश की आवमानना पर बालाघाट कलेक्टर सहित नौ लोगों को नोटिस

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। शासकीय देवी तालाब को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कराने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी भोपाल ने आदेशों के पालन नहीं होने पर सख्त नाराज है। उसने अवमानना याचिका पर कलेक्टर बालाघाट सहित नौ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। छह सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अवमानना याचिका दायर की

बालाघाट निवासी द्वारका नाथ चैधरी एवं प्रदीप परांजपे ने देवी तालाब को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए एनजीटी भोपाल में याचिका दायर की थी। इस मामले में एनजीटी ने 27 अप्रैल 2026 को अंतिम आदेश पारित करते हुए जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों को वेटलैंड नियम 2017 के तहत तालाब संरक्षण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि आदेश पारित होने के कई महीने बाद भी उसका प्रभावी पालन नहीं किया गया। जिसके चलते उन्हें न्यायाधिकरण में अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।
नौ अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया
याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर निष्पादन याचिका क्रमांक 13ध्2026 पर 24 जुलाई 2026 को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता धरमवीर शर्मा ने पैरवी की। अवमानना याचिका में प्रमुख सचिव, वन मंत्रालय, भोपाल कलेक्टर, बालाघाट अनुविभागीय अधिकारी,राजस्व बालाघाट, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका परिषद बालाघाट तथा संभागीय अधिकारी, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जबलपुर को प्रतिवादी बनाया गया है।
सूचना एंव चेतावनी बोर्ड लगाएं
एनजीटी के अंतिम आदेशों में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि जिला प्रशासन वेटलैंड नियम, 2017 की धारा.4 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे। इसके तहत तालाब का सीमांकन, बाड़बंदी,सूचना एवं चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तथा प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को हटाया जाए। इसके अलावा नगरपालिका परिषद को समयबद्ध योजना बनाकर तालाब की सफाईए प्लास्टिक एवं ठोस कचरे की रोकथाम तथा वैज्ञानिक तरीके से खरपतवार हटाने के निर्देश दिए गए थे। वहीं वन विभाग और नगरपालिका को संयुक्त रूप से तालाब की परिधि में स्थानीय प्रजातियों के पौधों का सघन वृक्षारोपण करने तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समय.समय पर जल गुणवत्ता की निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए थे।