वृद्धाश्रम की लापरवाही से सुमित्रा की देह सड़ गई,मेडिकल काॅलेज लेने से मना किया - rashtrmat.com

वृद्धाश्रम की लापरवाही से सुमित्रा की देह सड़ गई,मेडिकल काॅलेज लेने से मना किया

 राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। रीवा के वृद्धाश्रम स्वागत भवन में एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुमित्रा सिंह  ने मृत्यु के बाद मेडिकल कॉलेज में देहदान करने का संकल्प लिया था, लेकिन आरोप है कि वृद्धाश्रम प्रबंधन की कथित लापरवाही के चलते उनकी अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
शव की खराब स्थिति के चलते स्वीकार नहीं
मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग द्वारा शव की खराब स्थिति के चलते उसे स्वीकार नहीं किए जाने की बात सामने आई है। इतना ही नहीं, अब इस मामले में पुलिस को दी गई सूचना की तारीख और उस पर किए गए हस्ताक्षर को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
देहदान करने का संकल्प लिया था
दरअसल, पूरा मामला रीवा के स्वागत भवन वृद्धाश्रम का है, जहां रहने वाली सुमित्रा सिंह की बीमारी के बाद मौत हो गई। बताया जाता है कि महिला ने मृत्यु के बाद अपना शरीर मेडिकल कॉलेज को चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए देहदान करने का संकल्प लिया था। इसके लिए उन्होंने बाकायदा संकल्प पत्र भी दिया था।
शव की पीठ और कूल्हे के हिस्से में घाव
लेकिन आरोप है कि महिला की मृत्यु के बाद उनके शव को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए। जब शव को देहदान के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, तो एनाटॉमी विभाग ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। विभाग की ओर से शव की पीठ और कूल्हे के हिस्से में घाव, सड़न, दुर्गंध और लार्वा मिलने की बात सामने आने का दावा किया गया है।
देहदान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी
मेडिकल कॉलेज की अध्यक्ष डॉ. मेघना के अनुसार, शव को काफी देर तक खुले में रखा गया था और डीप फ्रीजर का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसी वजह से शव की स्थिति खराब होने की बात कही गई, जिसके चलते देहदान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
पुलिस को दी गई सूचना पर भी सवाल
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महिला की मृत्यु की जानकारी एक तारीख को सामने आई थी, जबकि अमहिया थाने में अगले दिन दी गई सूचना में मृत्यु की तारीख भी उसी दिन की दर्शाई गई, जिस दिन सूचना दी गई। इस तारीख के अंतर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप यह भी है कि वृद्धाश्रम के प्रबंधक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने स्वयं पुलिस को दी गई सूचना पर हस्ताक्षर नहीं किए, बल्कि वृद्धाश्रम के भृत्य राकेश सोंधिया उर्फ राजू के हस्ताक्षर से आवेदन थाने में प्रस्तुत किया गया।
व्यक्ति के माध्यम से सूचना क्यों नहीं दी गई?
सवाल उठाया जा रहा है कि यदि प्रबंधक किसी कारणवश उपस्थित नहीं थे, तो नियमानुसार किसी सक्षम व्यक्ति के माध्यम से सूचना क्यों नहीं दी गई? क्या घटना के समय प्रबंधक वृद्धाश्रम में मौजूद थे? और यदि मौजूद नहीं थे, तो उनकी अनुपस्थिति की वजह क्या थी? हालांकि, इन आरोपों और परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रेडक्रॉस सचिव की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में रेडक्रॉस के सचिव राजेंद्र पांडेय की भूमिका और सक्रियता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की देखभाल और व्यवस्थाओं की निगरानी में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। यदि समय रहते महिला के उपचार, देखभाल और मृत्यु के बाद शव को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाती, तो शायद उनकी देहदान की इच्छा पूरी हो सकती थी।
सूचना में तारीख का अंतर कैसे आया
इस घटना ने वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रबंधन की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर बीमार महिला को समय पर उचित उपचार मिला या नहीं? मृत्यु के बाद शव को डीप फ्रीजर में क्यों नहीं रखा गया? पुलिस को दी गई सूचना में तारीख का अंतर कैसे आया और प्रबंधक ने स्वयं हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?
नियमानुसार कार्रवाई की जाए
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। प्रबंधक, रेडक्रॉस सचिव और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच हो तथा यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की अधूरी रह गई अंतिम इच्छा का नहीं, बल्कि उन तमाम बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है, जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में वृद्धाश्रम पर निर्भर हैं।**

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