राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष इंजीनियर राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दो चुनाव आयुक्तों की बातों को दरकिनार करके लोकतंत्र को कुचला है। कायदे से जिन राज्यों में एसआईआर हुए हैं वहां फिर से चुनाव होने चाहिए।

ज्ञानेश के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चले
एसआईआर प्रक्रिया के जरिये देश के 30 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए है। यह सब बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। रीवा में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 30 सितम्बर को कांग्रेस प्रदर्शन करेगी। कलेक्ट्रेड का घेराव करेगी। कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लिया जाना चाहिए तथा उनके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
आयुक्तों की आपत्ति को 14 दफा खारिज किया
जिला कांग्रेस कार्यालय में एक चर्चा के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष इंजीनियर राजेन्द्र शर्मा ने यह बात कही। उन्होने कहा कि जून 2005 में बिहार में एसआईआर की शुरूआत की गयी। वहां सफल होने के बाद ज्ञानेश कुमार ने 14 बार सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्ति को ज्ञानेश कुमार ने नजरअंदाज किया। चुनाव आयुक्तों की शक्तियों को न केवल कुचला बल्कि लोकतंत्र को ज्ञानेश कुमार ने कुचला।ज्ञानेश कुमार ने एकतरफा और असंवैधानिक फैसले लेते गए। यह बात बार बार राहुल गांधी मीडिया से कह रहे थे। वोट चेारी का मुद्दा वो लगातार उठाते आए हैं लेकिन उनकी बातों पर अब लोग ज्यादा विश्वास करने लगे हैं। जब से इंडियन एक्सप्रेस में रिपोर्ट आई देश ज्ञानेश कुमार को देशद्रोह की नजर से देख रहे हैं।

परिवर्तन का अधिकार चुनाव आयुक्त को नहीं
उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों एवं भारत मतदाता सूची नियमावली, 1960 के अनुसार बनाया गया था। इस परिवर्तित प्रारूप में आवेदक के पूर्वजों से संबंधित मतदाता सूची में नाम होने की जानकारी चाही गई, जिसे प्रत्येक आवेदक के लिए प्रस्तुत करना संभव नहीं था। इसके माध्यम से करोड़ों मतदाताओं को मतदान से वंचित किया गया।
आपत्ति पर कोई सुनवाई नहीं हुई
इंजी. राजेन्द्र शर्मा ने दूसरी प्रमुख आपत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में विधानसभा स्तर पर नाम जोड़े जाने के संबंध में दावा-आपत्ति का अधिकार विधानसभा निर्वाचन अधिकारी (एसडीएम) को होता था, किंतु नए सॉफ्टवेयर के प्रावधान के अनुसार विधानसभा, जिला स्तर एवं राज्य स्तर के अधिकारियों को इस सॉफ्टवेयर को संचालित करने तथा नामों में सुधार करने का अधिकार नहीं है। बल्कि पूरे सॉफ्टवेयर को संचालित करने का अधिकार डीजीआईटी की महानिदेशक डॉ. सीमा खन्ना के पास है। उन्होंने कहा कि पूरे सॉफ्टवेयर को संचालित करने का अधिकार एक व्यक्ति को सौंपे जाने का विरोध चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी ने किया था तथा संबंधित मंत्री को पत्र भी लिखा गया। किंतु उनकी आपत्ति पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
सॉफ्टवेयर के माध्यम से नाम जोड़ दिए
पश्चिम बंगाल में 38 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े जाने के आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें 22 लाख मतदाताओं ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था और 16 लाख आवेदन ऐसे थे, जिनमें बिना किसी पहचान के सीधे सॉफ्टवेयर के माध्यम से नाम जोड़ दिए गए। इसी तरह गोवा के विधानसभा चुनाव में 97 मतदाताओं के नाम जोड़ने की अनुशंसा की गई, किंतु सॉफ्टवेयर में निर्वाचन अधिकारी की पहुंच नहीं होने के कारण उन मतदाताओं के नाम नहीं जोड़े जा सके, फलतः वे मताधिकार से वंचित हो गए।