पासपोर्ट नागरिकता का सबूत क्यों नहीं सरकार स्पष्ट करे-खरे - rashtrmat.com

पासपोर्ट नागरिकता का सबूत क्यों नहीं सरकार स्पष्ट करे-खरे

 राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि विदेश मंत्रालय के द्वारा पासपोर्ट को नागरिकता के बजाय सिर्फ यात्रा दस्तावेज बताया जाना बहुत आपत्तिजनक एवं हास्यास्पद है। भारत के करोड़ों लोगों को विदेश आने-जाने के लिए प्रारंभिक तौर पर पासपोर्ट के साथ वीजा की जरूरत होती है। पासपोर्ट बनाने के लिए वह सारी प्रक्रियाएं पूरा करना होती हैं जिसके आधार पर संबंधित व्यक्ति अपने आप को भारत का नागरिक बताता है। नागरिकता के बिना दूसरे देशों के द्वारा वीजा नहीं बनाया जा सकता। ऐसी स्थिति में विदेश यात्रा संभव नहीं हो सकती।
पासपोर्ट के बिना वीजा भी नहीं बनेगा
पासपोर्ट यदि सिर्फ यात्रा दस्तावेज है तो फिर उसे बनाने की प्रक्रिया इतनी जटिल क्यों रखी गई है। बिना नागरिकता का निर्धारण किए करोड़ों लोगों को भारत से विदेश आने-जाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। बिना नागरिकता निर्धारण विदेश की आवा-जाही बंद होना चाहिए। श्री खरे ने कहा कि पासपोर्ट के बिना वीजा भी नहीं बनेगा। पासपोर्ट और वीज़ा दोनों अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए ज़रूरी दस्तावेज हैं, लेकिन दोनों का काम अलग-अलग है। पासपोर्ट पहचान और नागरिकता का प्रमाण है जो अपने देश द्वारा जारी होता है, जबकि वीज़ा किसी दूसरे देश में प्रवेश करने की अनुमति है , जो उस गंतव्य देश द्वारा जारी किया जाता है। श्री खरे ने कहा कि भारत में आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, गरीबी रेखा कार्ड, आयकर परिचय पत्र, जमीनी दस्तावेज , बोर्ड परीक्षा की अंकसूची, घर होने का प्रमाण पत्र, जमीन की रजिस्ट्री, जन्म प्रमाण पत्र, जनगणना, न्यायालय में चलरहे मुकदमे, निवास प्रमाण पत्र , पुलिस वेरीफिकेशन, बैंक पासबुक, सरकारी नौकरी का प्रमाण पत्र, मैरिज सर्टिफिकेट, आयुष्मान कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सीनियर सिटीजन कार्ड, वकालत लाइसेंस, बिजली का बिल, टेलीफोन कनेक्शन, मोबाइल सिम , दुकान लाइसेंस, बंदूक लाइसेंस, डॉक्टर होने का प्रमाण पत्र,‌ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और लोकतंत्र सेनानी परिचय पत्रों आदि में से एक भी दस्तावेज ऐसा नहीं जिस आधार पर देश के किसी व्यक्ति की नागरिकता तय की जा सके।
नागरिकता को लेकर सवाल
नागरिकता तय नहीं हैयह भारी विडंबना है कि देश के करोड़ों लोग चुनाव में वोट देकर सरकार बना सकते हैं लेकिन इस आधार पर उनकी नागरिकता तय नहीं है। यह बहुत अजीबोगरीब बात है कि देश के पास अपना संविधान और जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार होने के बावजूद लोगों की नागरिकता को लेकर सवाल किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया में भारत एकमात्र देश है जहां किसी भी व्यक्ति को नागरिकता को लेकर कटघरे में खड़ा किया जा सकता है। श्री खरे ने कहा कि धर्म जाति सम्प्रदाय को आधार बनाकर देश की नागरिकता तय नहीं की जा सकती है।