राष्ट्रमतन्यूज,रीवा(ब्यूरो)। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के रीवा में संजय गांधी अस्पताल के डाॅक्टर मरीजों के साथ मारपीट करते ही हैं। अब संजय गांधी अस्पताल की नर्सिग स्टाफ के साथ मारपीट होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने 48 घंटे के अंदर FIR दर्ज कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन ऐसा नहीं होने पर नर्सिग स्टाफ ने आठ अक्टूबर से धरने पर जाने का फैसला किया है। जाहिर सी बात है एक साथ छह सो से अधिक नर्सो के धरने पर बैठ जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी।

विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए
इसी के चलते अब नर्सिंग स्टाफ ने बड़ा ऐलान करते हुए 8 अक्टूबर की सुबह 8 बजे से धरने पर बैठने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि इस धरने में संजय गांधी अस्पताल का करीब 500 से 600 नर्सिंग स्टाफ शामिल होगा। नर्सिंग स्टाफ की सबसे बड़ी मांग है कि अस्पताल और संस्थान की ओर से ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि अस्पताल में काम करने वाले नर्सिंग स्टाफ के साथ किसी भी तरह की मारपीट, अभद्र व्यवहार या दुर्व्यवहार की घटना दोबारा न हो।

FIR दर्ज की जाए
4 अक्टूबर की घटना में नर्सिंग स्टाफ के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी मांग की जा रही है। नर्सेस एसोसिएशन का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ दिन-रात मरीजों की सेवा में लगा रहता है, ऐसे में ड्यूटी के दौरान यदि कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े होंगे। एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा।
नर्सिंग स्टाफ के धरने पर बैठने से
वहीं 8 अक्टूबर से बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ के धरने पर बैठने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब देखना होगा कि नर्सिंग स्टाफ के इस ऐलान के बाद अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और क्या धरना शुरू होने से पहले नर्सिंग स्टाफ की मांगों का समाधान हो पाता है या फिर संजय गांधी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा संकट खड़ा होता है। इस पूरे मामले को लेकर नर्सेस एसोसिएशन की अध्यक्ष अंबिका तिवारी ने भी अपनी बात रखी है।