राष्ट्रमत न्यूज कोलकात्ता ब्यूरो)। तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर खान को नौ दिन पहले उनकी गिरफ्तारी के बाद से पुलिस ने उनके गढ़ फाल्टा में तीन बार घुमाया है। इससे नाराज होकर उनके समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शन किया। जिसका नेतृत्व उनकी पत्नी ने किया। इस विरोध-प्रदर्शन में कथित तौर पर एक पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश भी शामिल है, जिससे जहांगीर खान को छुड़ाया जा सके।

माफी मांगते नजर आ रहे
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर सड़कों पर भी दिखने लगा है। स्थानीय प्रभावशाली नेताओं और बाहुबलियों समेत कई टीएमसी नेताओं और उनके सहयोगियों को पुलिस या अर्धसैनिक बलों द्वारा उनके प्रभाव वाले इलाकों में सार्वजनिक रूप से घुमाया गया। इनमें से कई नेता सिर्फ अपने अंतर्वस्त्रों में थे और उनके हाथों में हथकड़ी या कमर में रस्सी बंधी हुई थी। इस जुलूस के वायरल वीडियो में गिरफ्तार नेता कान पकड़े, उठक-बैठक करते और सार्वजनिक रूप से माफी मांगते नजर आ रहे हैं।
मानहानि या अपमान नहीं किया जा सकता
इस तरह की एक सार्वजनिक परेड के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने राज्य की भाजपा सरकार को फटकार लगाते हुए घटना के नियमों और परिस्थितियों पर रिपोर्ट मांगी। न्यायालय ने कहा कि व्यक्तियों को गिरफ्तार और उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन जानबूझकर मानहानि या अपमान नहीं किया जा सकता।
पूरी तरह से जांच संबंधी कार्रवाई है
पुलिस अपने कार्यों का बचाव करते हुए कहती है कि ये पूरी तरह से जांच संबंधी कार्रवाई है, जिसका उद्देश्य अपराध स्थल का पुनर्निर्माण करना है। अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से कहा कि वे कुछ आरोपियों के आसपास फैली उनकी उस धारणा को तोड़ना चाहते हैं, जिसको लेकर वह अभी तक बनाए हुए हैं कि उनका कोई कुछ नहीं कर सकता।
मानवाधिकारों का हनन है
एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने चेतावनी दी कि पुलिस बहुत नाजुक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद जैसे गंभीर आरोपों या आरोपी के फरार होने के खतरे को छोड़कर, हथकड़ी तक नहीं लगाई जाती। जहां तक कमर में रस्सी बांधकर आरोपी को घुमाने की बात है, उसका कानून में कोई आधार नहीं है। विधि एवं व्यवस्था के महानिदेशक अजय मुकुंद रानाडे ने फोन या संदेशों का जवाब नहीं दिया।टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ मामला दर्ज करने की योजना बना रही है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यह अनुच्छेद 21 का सरासर उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन है।