सेवाराम त्रिपाठी मानते हैं सत्ताएं कोई भी हों एकदम दूध की धुली नहीं होतीं,लेकिन इतनी बेगैरत…
Category: व्यंग्य
पोषितों के कुपोषण का महात्म्य \ व्यंग्य
डाॅ प्रदीप उपाध्याय का कहना है कुपोषण को भी हमें नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए।…
इलाहाबाद की बकैती में गजब का लोकतंत्र \ व्यंग्य
इलाहाबाद की बकैती में गजब का लोकतंत्र है।यहाँ प्रोफेसर, छात्र, रिक्शेवाला, पानवाला सब बराबरी से ज्ञान…
एपस्टीन फाइल में कॉकरोच मंत्री,कॉकरोचिस्तान की संसद में हंगामा \ व्यंग्य
रमेश कुमार ‘रिपु’ बता रहे हैं “कॉकरोच जनता पार्टी” श्रृंखला के व्यंग्य समकालीन राजनीति की उन…
प्रेस’ है तो डर काहे का \ व्यंग्य
चन्द्रवती शुक्ला बता रही हैं कि प्रेस लिखे वाहनों को छोटे शहरों में अक्सर पुलिस वाले…
सिस्टम वीक तो पेपर लीक \ व्यंग्य
गिरीश पंकज बता रहे हैं कि देश में कोई भी पेपर लीक कैसे होता है। और…
सिलिकॉन का दिमाग और उनकी नाराज़गी
अब हम वाई–फाई–सक्षम प्राणी हो गए हैं। हमारी स्मृति क्लाउड में है, भावनाएँ इमोजी में और…