16 करोड़ की उखड़ी सड़क पर ठेकेदार ने डामर का पैच लगाया - rashtrmat.com

16 करोड़ की उखड़ी सड़क पर ठेकेदार ने डामर का पैच लगाया

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की उम्मीद लेकर बनाई जा रही बिरसा और किरनापुर विकासखंड को जोड़ने वाली डाबरी बोदलझोला कलकत्तालातरी मार्ग की सड़क जगह जगह अभी से उखड़ गयी है। 16 करोड़ की लागत से बनी यह सड़क करीब 27 किलोमीटर लम्बी है। खुली आंखों से देखा जा सकता है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी की गयी है।ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है।


अभी से उखड़ने लगी सड़क
सड़क का निरीक्षण करने पर कई चैंकाने वाले तथ्य सामने आए। अभी सड़क का बिटुमिनस टाप यानी बीटी लेयर निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है लेकिन नव निर्मित सड़क कई स्थानों पर उखड़ने लगी है। विशेष रूप से घाट सेक्शन तथा लातरी से मोहरदल्ली के बीच सड़क की सतह पर दरारेंए उखड़ाव और पैचवर्क साफ दिखाई दे रहा है।
डामर का पैच लगा दिया ठेकेदार ने
जहां सड़क क्षतिग्रस्त हुई वहां ठेकेदार ने केवल डामर के पैच लगाकर खामियों को छिपाने का प्रयास किया।जिस पर अभी तक अधिकारियों की भी नजर नहीं पड़ी है। तकनीकी के जानकार बताते हैं कि सड़क निर्माण में बिटुमिनस मिक्स का ग्रेडेशन, डेंसिटी, कंपेक्शन और बाइंडिंग क्वालिटी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप मटेरियल सामग्री का उपयोग न किया जाए तो सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों में उखड़ने लगती है। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर साइड शोल्डर धंसने के भी प्रमाण मिले। जिन्हें जल्दबाजी में मिट्टी डालकर ढंक दिया गया।


पुल के पिलर भी सड़क जैसे
यह मामला केवल सड़क तक सीमित नहीं है। ग्राम बोदलझोला के समीप चैन क्रमांक 8600 पर निर्माणाधीन ब्रिज क्रमांक.810 की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल के पिलरों की फाउंडेशन डेप्थ निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं रखी गई है। यदि किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी द्वारा फाउंडेशन की गहराई, कंक्रीट गुणवत्ता और संरचनात्मक डिजाइन की जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।


निर्माण की गुणवता पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि दूरस्थ और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण विभागीय अधिकारी नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। जिसका फायदा ठेकेदार उठा रहा है।यदि काम सही है तो फिर निर्माण शुरू होते ही सड़क की यह स्थिति क्यों बन गई। यह मार्ग नक्सल मोर्चे पर तैनात सुरक्षाबलों की आवाजाही के साथ-साथ आदिवासी अंचलों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल सरकार की प्रगतिशील योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क प्राधिकरण के महाप्रबंधक तोवेंद्र सिंह जौहरे का कहना है कि विभाग लगातार निगरानी क रहा है।गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित कराया जाएगा।