जंगला में राहुल गांधी मृत 32 आदिवासी बच्चों के परिवार से मिलेंगे - rashtrmat.com

जंगला में राहुल गांधी मृत 32 आदिवासी बच्चों के परिवार से मिलेंगे

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा ब्लाक के छह गांवो में में मई से सितंबर तक 32 आदिवासी बच्चों की गंभीर बीमारी की वजह से मौत हो गई। अगस्त महीने में जैसे ही बच्चों की लगातार हो रही मौतों की खबर मीडिया में आने पर सबका ध्यान उस ओर गया। प्रशासन मौत के आंकड़े छिपाता रहा। लेकिन विपक्ष ने प्रशासन के सामने बच्चों की मौत के सारे आंकड़े रख दिये। आदिवासी बैगा बस्ती में हुई मौत की वजह को करीब से जानने के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक अक्टूबर को बालाघाट आ रहे हैं।

प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी  गोंदिया के बिरसी एयरपोर्ट पहुंचने के बाद सड़क मार्ग से बालाघाट जिले के बिरसा क्षेत्र के जगला गांव जाएंगे। यहां वे मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा और पूरे मामले की जानकारी लेंगे। राहुल गांधी का प्रभावित परिवारों से मुलाकात का कार्यक्रम दोपहर 2:15 बजे से 3 बजे तक प्रस्तावित है। इसके बाद वे मीडिया से बातचीत करेंगे। शाम करीब 5:45 बजे उनके नई दिल्ली के लिए रवाना होने का कार्यक्रम बताया गया है।

इन बच्चों की हुई मौतें
जगला गांव सबसे पहली मौत 16 दिन के मासूम जेठलाल धुर्वे के बेटे अंकित धुर्वे की मौत हुई थी। अंकित की मौत की वजह परिजनों ने पिलिया और बुखार बताया है। वहीं, दूसरी मौत दो अगस्त को निमोनिया से हुई थी। गौर करने वाली बात ये है कि वह बैहर के अस्पताल में एक दिन भर्ती रही और दो अगस्त तक जिला अस्पताल में  भर्ती रही। बावजूद इसके निलम का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज 32 बच्चों में शामिल नहीं है। फिर 20 अगस्त को संतोष के बेटी सरस्वती धूर्वे की मौत भी 30 अगस्त को हुई थी। उस मासूम की उम्र महज पांच माह थी। फिर 1 महीने के बिसरू की मौत दो सितंबर को हुई थी। लू टोला में महज 15 दिन की सरीता की मौत हुई। इसमें किसी भी बच्चे की मौत सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं।

 32 मीजल्स पॉजिटिव, मलेरिया के 50 केस

सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के मुताबिक, NCDC दिल्ली और NSCB जबलपुर की टीमों ने मौके पर 10-10 सैंपल लिए। NIV पुणे को 20 और ICMR जबलपुर को 24 सैंपल भेजे गए। कुल 101 मीजल्स सैंपल में 32 बच्चे पॉजिटिव मिले।मलेरिया के लिए भोपाल और दिल्ली भेजे गए 64 सैंपल में 50 पॉजिटिव आए। डेंगू के 28 सैंपल में दो पॉजिटिव मिले जबकि एक सैंपल चिकनगुनिया का पॉजिटिव आया।

कार्यक्रम की व्यापक तैयारियां
राहुल गांधी के दौरे को लेकर जिला कांग्रेस और स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रभावित परिवारों के अलावा स्थानीय आदिवासी समाज के लोगों और कांग्रेस नेताओं से भी राहुल गांधी की मुलाकात संभावित है। जगला गांव में उनके कार्यक्रम की व्यापक तैयारियां हो रही है।
गौरतलब है कि बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है। मौतों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों और राजनीतिक दलों के दावों में अंतर तो आ रहा है, लेकिन राहुल गांधी पीड़ित परिवारो से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त करेगें। साथ ही उनके चर्चा करके तमाम सुविधाओं की जानकारी लेगें।

राजेन्द्र शुक्ल ने जिम्मेदारी तय नहीं की

आदिवासी अंचलों में बैगा आदिवासी बच्चों की हो रही लगातार मौतों के बाद सबसे पहले 21 अगस्त को मंत्री कुंवर विजयशाह पहुंचे, लेकिन उनका दौरा भी औपचारिक रहा। इसके बाद 22 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल पहुंचे तो उन्होंने भी बच्चों की मौत पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की।उन्होंने सिर्फ मलेरिया अधिकारी का ट्रांसफर कर दिया और सीएमएचओ से उनका अतिरिक्त टीकाकरण का प्रभार वापस ले लिया।

देश की भी नजर रहेगी

बच्चो की मौत के पीछे आये कारणो मलेरिया, खसरा, संक्रमण, कुपोषण जैसे अन्य बिंदु उनकी चर्चा का विषय हो सकता है। अब 1 अक्टूबर को बालाघाट में उनकी प्रभावित परिवारों से मुलाकात बाद प्रदेश ही नहीं, देश की भी नजर रहेगी। क्योकि पीड़ित परिवारो से मुलाकात के बाद राहुल गांधी सरकार को घेरने लोकसभा में यह मुद्दा रख सकते है।

राष्ट्रपति से प्रभावित गांवों में आने की अपील 
बालाघाट के बोंदारी गांव में सबसे ज्यादा आठ बच्चों की मौत हुई है. ऐसे में उस गांव में बच्चों की याद में स्मारक बनाया है. वहीं, पूरे ग्रामीण हर दिन उस स्मारक के पास बैठ कर महामहीम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से निवेदन कर रहे है, कि वह भी उन प्रभावित गांवों का दौरा करें। ग्रामीणों का कहना है कि महामहिम राष्ट्रपति भी आदिवासी समुदाय से आती है. ऐसे में वह उन बैगा आदिवासियों का दर्द समझे, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। ऐसे में वह आए और इस इलाके में सुविधाओं के लिए ठोस कदम उठाए।

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