रमेश कुमार रिपु की कहानी नेहा का घमंड बताती है कि सुंदरता पर घमंड नहीं करना चाहिए।सुंदरता अच्छी बात है, लेकिन असली खूबसूरती अच्छे व्यवहार में होती है।धन किसी को बड़ा नहीं बनाताlपैसे वाला होना संयोग हो सकता है, लेकिन दूसरों की मदद करना और विनम्र रहना हमारी अपनी अच्छाई है।
नेहा का घमंड \ कहानी
सुंदरवन में तरह-तरह के जानवर रहते थे। कोई बड़ा था, कोई छोटा; कोई अमीर था, कोई गरीब। लेकिन जंगल में सब एक-दूसरे को जानते थे और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करते थे।
उसी जंगल में एक सुंदर हिरनी रहती थी।उसका नाम था नेहा।
नेहा सचमुच बहुत सुंदर थी। उसकी चमकती आंखें, मुलायम भूरे बाल और तेज चाल देखकर जंगल के कई जानवर उसकी तारीफ करते थे।
लेकिन नेहा की सुंदरता से भी बड़ी थी उसकी एक आदत,उसे अपनी सुंदरता और अपने परिवार की दौलत पर बहुत घमंड था।नेहा के माता-पिता बहुत धनवान थे। उनके पास सबसे अच्छे फलों का बगीचा था। घर बड़ा था और खाने-पीने की कोई कमी नहीं थी।
लेकिन नेहा के माता-पिता का स्वभाव अपनी बेटी से बिल्कुल अलग था।वे जरूरतमंदों की मदद करते थे।किसी के घर खाने की कमी होती तो फल भेज देते।किसी का बच्चा बीमार होता तो उसकी दवा का इंतजाम कर देते।किसी के घर मेहमान आते तो खुशी-खुशी कहते,“हमारा घर भी आपका ही घर है।”
जंगल के जानवर उन्हें बहुत सम्मान देते थे।
लेकिन नेहा को यह सब बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था।
एक दिन उसने अपनी मां गुड़िया से कहा,“मां, आप हर किसी की मदद क्यों करती रहती हैं?”
गुड़िया ने मुस्कुराकर पूछा,“क्योंकि किसी के काम आना अच्छी बात है।”
नेहा ने मुंह बनाया।
“लेकिन हम पैसे वाले हैं तो अपनी किस्मत से हैं। हम क्यों दूसरों की मदद करें?”
मां ने कहा,“बेटी, धन इसलिए नहीं मिलता कि हम दूसरों को छोटा समझें।”
नेहा बोली,“मुझे तो लगता है जिसके पास पैसा होता है, उसके आगे चार लोग घूमते हैं। जिसके पास पैसा नहीं होता, उसकी कोई इज्जत नहीं करता।”
गुड़िया कुछ देर चुप रहीं।फिर बोलीं,“नेहा, यह बात याद रखना,लोग कभी-कभी धन की वजह से तुम्हारे पास आ सकते हैं, लेकिन दिल से वही तुम्हारे पास रहेगा जिसे तुम्हारे व्यवहार में अपनापन मिलेगा।”
नेहा ने बात अनसुनी कर दी।
“आपको जो करना है कीजिए। मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगी और न किसी की मदद के लिए दौड़ूंगी।”
मां ने उसे समझाया,“दूसरों को देखकर मुंह मत बनाओ। और अपनी सुंदरता पर भी इतना घमंड मत करो। दुनिया में तुमसे भी सुंदर कोई हो सकता है।”
नेहा हंस पड़ी।“मुझसे सुंदर?”
गुड़िया मुस्कुराईं।“समय सबको जवाब देता है, बेटी।”
उसी जंगल में एक बंदर रहता था चिंटू।चिंटू गरीब था।उसके पास न बड़ा घर था, न फलों का बगीचा और न ही ढेर सारा धन।लेकिन चिंटू पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार था।वह अपने माता-पिता का बहुत सम्मान करता था।जंगल में कोई बूढ़ा जानवर रास्ता पार करना चाहता तो चिंटू उसकी मदद करता।किसी बच्चे को पढ़ाई में परेशानी होती तो उसे समझाता।किसी को पेड़ से फल तोड़ने में दिक्कत होती तो पेड़ पर चढ़कर फल तोड़ देता।उसके पास जितना होता, उसमें से भी वह दूसरों के साथ बांट लेता।
एक दिन नेहा ने उसे देखा तो अपनी सहेली से बोली,“देखो, खुद के पास कुछ नहीं है और चला है दूसरों की मदद करने!”
चिंटू ने उसकी बात सुन ली।लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।बस मुस्कुराकर आगे बढ़ गया।
कुछ दिन बाद सुंदरवन में बहुत तेज बारिश हुई।नदी का पानी बढ़ने लगा।जंगल के कई रास्ते बंद हो गए।बारिश लगातार तीन दिन तक होती रही।
चिंटू ने अपने पढ़े हुए भूगोल के नक्शे को याद किया और समझ गया कि अगर बारिश इसी तरह होती रही तो नदी का पानी जंगल के निचले हिस्से में पहुंच सकता है।वह दौड़ता हुआ जानवरों को सावधान करने लगा।
“सब लोग अपना सामान ऊंची जगह पर ले जाइए। नदी का पानी बढ़ रहा है।”
कई जानवरों ने उसकी बात मान ली।नेहा ने जब चिंटू को भागते देखा तो हंसकर बोली,“तुम्हें तो हर समय खतरा ही दिखाई देता है!”
चिंटू ने कहा,“नेहा, मजाक मत करो। पानी सच में बढ़ रहा है।”
नेहा ने गर्दन घुमाई।
“मेरे घर में सब इंतजाम है। मुझे किसी की मदद की जरूरत नहीं।”
चिंटू आगे बढ़ गया।रात में बारिश और तेज हो गई।नदी का पानी जंगल में घुसने लगा।
नेहा अपने घर में सो रही थी।अचानक उसकी नींद एक तेज आवाज से खुली।
छपाक!उसने नीचे देखा।घर के बाहर पानी भर चुका था।नेहा घबरा गई।
“मां!”
गुड़िया भी उठ गईं।पानी तेजी से घर के अंदर आने लगा।अब उन्हें समझ में आ गया कि चिंटू सही कह रहा था।गुड़िया ने कहा,“नेहा, जल्दी ऊंची पहाड़ी की तरफ चलो!”
लेकिन बाहर निकलते ही रास्ता पानी में डूबा हुआ था।नेहा घबरा गई।
“अब हम कैसे जाएंगे?”
तभी बाहर से आवाज आई,“नेहा! आंटी! इधर आइए!”
नेहा ने देखा। चिंटू एक मजबूत बेल पकड़े खड़ा था।उसने बेल का दूसरा सिरा ऊंचे पेड़ से बांध रखा था।
“इसे पकड़कर धीरे-धीरे आइए। मैं आपको सुरक्षित जगह तक ले जाऊंगा।”
नेहा कुछ पल चिंटू को देखती रही।जिसे वह गरीब समझकर छोटा समझती थी, वही आज उसके सामने मदद के लिए खड़ा था।नेहा ने बेल पकड़ी।चिंटू आगे-आगे चलता रहा।काफी मुश्किल के बाद वह नेहा और उसकी मां को सुरक्षित पहाड़ी तक ले गया।नेहा की आंखों में आंसू आ गए।
उसने धीरे से कहा,“चिंटू… अगर तुम नहीं आते तो?”
चिंटू मुस्कुराया।“तो कोई और मदद करता।”
नेहा ने कहा,“लेकिन तुमने तो मेरी बात भी नहीं मानी थी। मैंने तुम्हारा मजाक उड़ाया था।”
चिंटू बोला,“मुसीबत में पुरानी बातें नहीं देखी जातीं।”
नेहा कुछ नहीं बोल सकी।बारिश रुकने के बाद जंगल सामान्य होने लगा।एक दिन नेहा अपने घर के बाहर बैठी थी।उसने देखा कि चिंटू कुछ बच्चों को पढ़ा रहा है।उसके पास एक छोटी-सी किताब थी।
बच्चे बड़े ध्यान से उसकी बातें सुन रहे थे।नेहा धीरे-धीरे उसके पास गई।
“चिंटू…”
चिंटू ने मुस्कुराकर कहा,“हां?”
नेहा कुछ पल चुप रही।फिर बोली,“मुझे तुमसे कुछ पूछना है।”
“पूछो।”
“तुम्हारे पास इतना पैसा नहीं है, फिर भी सब तुम्हारा सम्मान क्यों करते हैं?”
चिंटू हंस पड़ा।
“मुझे नहीं पता।”
तभी पीछे से गुड़िया की आवाज आई,“क्योंकि सम्मान जेब में नहीं, व्यवहार में होता है।”
नेहा ने मां की ओर देखा।
इस बार उसने उनकी बात नहीं टाली।वह धीरे से बोली,“मां, शायद मैं गलत थी।”
गुड़िया ने उसे गले लगा लिया।“गलती समझ में आ जाए तो उससे बड़ी समझदारी और क्या होगी?”
नेहा ने चिंटू की ओर देखा।
“क्या तुम मुझे भी पढ़ाओगे?”
चिंटू मुस्कुराया।
“क्यों नहीं?”
“और अगर किसी को मदद की जरूरत हो तो…”
चिंटू ने उसकी बात पूरी कर दी,“तो हम दोनों मिलकर मदद करेंगे।”
नेहा पहली बार दिल से मुस्कुराई।उस दिन के बाद सुंदरवन में नेहा बदल गई।अब वह अपने कपड़ों और सुंदरता की तारीफ सुनकर इतराती नहीं थी।वह बूढ़े जानवरों का सम्मान करती।
जरूरतमंदों की मदद करती।और सबसे बड़ी बात अब वह किसी को उसके घर, कपड़े या धन से नहीं आंकती थी।
एक दिन उसने अपनी मां से कहा,“मां, अब मुझे समझ आया कि आपके पास इतना धन होने के बावजूद आप दूसरों की मदद क्यों करती थीं।”
गुड़िया ने पूछा,“क्यों?”
नेहा ने मुस्कुराकर कहा,“क्योंकि धन घर को बड़ा बनाता है… लेकिन अच्छे व्यवहार से दिल बड़ा होता है।”
पास खड़ा चिंटू यह सुन रहा था।वह मुस्कुराया।और सुंदरवन की हवा जैसे नेहा की नई समझदारी की खबर पूरे जंगल में ले गई।उस दिन से नेहा सुंदर तो पहले भी थी, लेकिन अब उसके व्यवहार ने उसे सचमुच खूबसूरत बना दिया था।
सीख:- धन और सुंदरता पर घमंड नहीं करना चाहिए। असली बड़प्पन अच्छे व्यवहार, विनम्रता, ज्ञान और दूसरों की मदद करने में है। किसी को गरीब समझकर छोटा नहीं समझना चाहिए।
रमेश कुमार रिपु
MO- 7974304532




