राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग हुए 26 साल हो गए हैं, लेकिन राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) को अब तक नहीं हटाया गया है। इस धारा के कारण पेंशनरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसी मुद्दे पर मंगलवार को प्रोग्रेसिव पेंशनर संघ के बैनर तले पेंशनरों ने एक बैठक की, रैली निकाली और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

काफी कम महंगाई भत्ता मिल रहा है
प्रोग्रेसिव पेंशनर संघ के जिलाध्यक्ष ए.एल. मोहारे ने बताया कि पेंशनरों को नियमित कर्मचारियों की तुलना में काफी कम महंगाई भत्ता मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) है, जिसे हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
ऐसी कोई बंधनकारी धारा नहीं है
मोहारे ने आगे बताया कि उत्तर प्रदेश से अलग होकर बने उत्तराखंड, बिहार से अलग होकर बने झारखंड और आंध्र प्रदेश से अलग होकर बने तेलंगाना राज्यों में ऐसी कोई बंधनकारी धारा नहीं है। यह स्थिति केवल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच ही है, जिसके कारण दोनों ही राज्यों के पेंशनरों को नुकसान हो रहा है। 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस धारा को अभी तक नहीं हटाया गया है।