चावल घोटाला कांडः FIR में नाम नहीं होने से सबकी जमानत मंजूर - rashtrmat.com

चावल घोटाला कांडः FIR में नाम नहीं होने से सबकी जमानत मंजूर

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट जिले के वारासिवनी थाना क्षेत्र में दर्ज सरकारी चावल के डायवर्जन मामले में हाईकोर्ट जबलपुर ने आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें जमानत दे दी। जमानत इसलिए मिल गयी कि एफआईआर में खंडेलवाल राइस उद्योग का नाम में दर्ज नहीं है।


संचेती राइस मिल की भूमिका संदिग्ध
भारतीय खाद्य निगम का करीब 2425 क्विंटल सरकारी चावल जिसे तीन ट्रकों के माध्यम से एव्हीआई एग्रो इथेनाल प्लांट छिंदवाड़ा भेजा जा रहा था। लेकिन उसे रास्ते में ही वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल में गलत तरीके से उतार दिया गया। प्रकरण में एव्हीआई एग्रो इथेनाल प्लांट छिंदवाड़ा के अधिकृत प्रतिनिधि राहुल प्रताप और संचेती राइस मिल के संचालक सहित अन्य लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आई।


पुलिस डायरी में अस्पष्ट
हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत जांच में यह तथ्य सामने आया कि एफसीआई से चावल 6 अप्रैल 2026 को जारी हुआ था और उसे एव्हीआई एग्रो इथेनाल प्लांट छिंदवाड़ा के लिए भेजा गया था। इसके बाद चावल एव्हीआई एग्रो इथेनाल प्लांट छिंदवाड़ा से होते हुए संचेती राइस मिल तक पहुंचा। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी गौर किया कि खंडेलवाल राइस उद्योग का नाम एफआईआर मे दर्ज नहीं है। और न ही जांच सामग्री में ऐसा स्पष्ट साक्ष्य सामने आया है कि सरकारी चावल सीधे उक्त उद्योग के पास है।


आवेदक की भूमिका स्पष्ट नहीं
कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के आरोप मुख्य रूप से सरकारी चावल के डायवर्जन से संबंधित हैं और उपलब्ध सामग्री के आधार पर आवेदकों की प्रत्यक्ष भूमिका प्रथम दृष्टया स्पष्ट नहीं होती। हाईकोर्ट ने 12 अगस्त के आदेश में आवेदकों को राहत प्रदान करने के आधार पर मामले को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए खुला रखा है। हालांकि अदालत की यह टिप्पणी अंतिम दोषमुक्ति नहीं मानी जाएगी। मामले की जांच और आगे की न्यायिक कार्यवाही में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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