राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांव अडोरी और मछुलदा पंचायत में हुई मौत को प्रशासन से लेकर सरकार तक छिपा रही है। जबकि प्रशासन ने अभी तक किस किस गांव में कितनी मौतें हुई है उसका खुलासा नहीं किया है। राष्ट्रमत के ब्यूरो रफी अंसारी ने गांवों में जाकर देखा किस किस गांव में कितनी मौतें हुई है। कुल बीस बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। हैरानी वाली बात है कि प्रशासन स्वयं बच्चों की मौत पर राजनीति शुरू किया तो राजनीतिक दल मौत के आंकड़ों की राजनीति शुरू कर दिये हैं।

प्रभारी मंत्री बताएं आठ बच्चे क्यों मरें
बोदरी गांव में 7 बच्चे मरे मछुलदा गांव में तीन मौत,मातला में तीन बच्चों की जान गई,कोंडेकसा में दो मौत, कोटीबी, कोना, गटिया,तेंदू डेही,चिखली खेर टोला, और कोरका, गांव में एक.एक बच्चे की जान गई। इस तरह कुल 20 बच्चों की मौत हुई है। लेकिन हैरानी वाली बात है कि प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह ने उल्टा कांग्रेस पर आरोप लगाकर चले गए कि कांग्रेस मौत की राजनीति कर रही है। अफवाह फैला रही हैं।सिर्फ आठ बच्चों की मौत हुई है। सवाल यह है कि आठ बच्चे क्यों मरें?

मौत का वारंट किसकी गलती से बना
प्रशासनिक आंकडो के अनुसार इस इन्फेक्शन से आठ बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन कांग्रेस ने जो आकंडा जारी किया है, उसके मुताबिक करीब 19 बच्चो की मौत हो चुकी है। इस मामले में अब गोगपा भी सामने आई है और गोंगपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राधेश्याम काकोडिया ने 21 बच्चो की मौत का आंकडा प्रकाश में लाया है। अब ऐसे में सवाल यही उठ रहे कि उन गांवों में संक्रमण कैसे फैला और किस विभाग की चूक है?सवाल यह है कि बच्चों के लिए मौत का वारंट किसकी गलती से बना।

सिस्टम को तगड़ा झटका
बैहर.बिरसा क्षेत्र के बैगा अंचल में बिगडे हालात ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है। कल तक अपने दायित्वों से पीछे भागने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम आज प्रभावित गांवो में पांव जमाये बैठी है। उनकी रिपोर्ट यही कह रही है कि गांव में लोगों को मलेरिया ज्यादा प्रभावित कर रहा है। जहां इलाके में 15 अगस्त तक की जांच में 2882 लोगो की जांच हुई और उनमें 241 से ज्यादा मरीज मलेरिया पसजिटिव निकल चुके है।