राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। रीवा के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के संदर्भ में विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंधार ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी महिला विमला की मौत के कई दिन हो गए लेकिन अभी तक उसकी मौत की रिपोर्ट क्यों नहीं आई। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर पावर प्लांट के संदर्भ में जो गाइड लाइन है उसके खिलाफ जाकर कैसे पावर प्लांट यहां लगा सकते हैं। रीवा के लोग भोपाल में जाकर प्रदर्शन कर रहे हैं और यहां का प्रशासन नियम विरूद्ध बातें करके ग्रामीणों को डरा धमका रहा है। ऐसा नहीं चलेगा। ग्रामीणों को प्रशासन डराए धमकाए नहीं,कांग्रेस यह बर्दाश्त नहीं करेगी।

विंध्य के लोग भोपाल में धरना दे रहे
क्षेत्र में प्लांट के विरोध में पिछले 24 दिनों से लगातार आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारियों के समर्थन में विंध्य के लोग भोपाल में धरना दे रहे हैं। छह दिन से जल सत्याग्रह भी शुरू हुआ है, जिसमें वे खुद दो दिन शामिल रहे।उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत हो गई, लेकिन शासन-प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर देखने तक नहीं पहुंचा। मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अनहोनी की आशंका जताई जा रही थी, इसके बावजूद रीवा प्रशासन सोया रहा।

नियमों के हिसाब से काम होगा
ग्रामीणों की आपत्तियों के बीच सिंघार ने मौके पर मौजूद अधिकारी से सवाल किया कि जब नियम और नीति स्पष्ट हैं तो आबादी और घरों के बीच परियोजना कैसे आगे बढ़ेगी उन्होंने प्रशासन से नियमों और प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की बातचीत के दौरान अधिकारी को जवाब देना पड़ा, जबकि मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा का विषय बनीं।
विमला की मौत की रिपोर्ट क्यों नहीं आई
सिंघार ने यह भी कहा कि जनता की जमीन, पानी, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े सवालों को दरकिनार कर किसी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए उन्होंने परियोजना का विरोध विधानसभा में उठाने की बात भी कही है। जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल की मौत को लेकर भी सिंघार ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार से सवाल किए उन्होंने पूछा कि मौत से संबंधित रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं भेजी गई इस मुद्दे पर प्रशासन और मृतका के परिवार के बयानों में अंतर सामने आया है, इसलिए घटना कीपरिस्थितियों को लेकर जांच और आधिकारिक तथ्यों की स्पष्टता महत्वपूर्ण हो गई है,सिंघार ने मृतका के परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी और कहा कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।

सवालों का जवाब नारों से नहीं
सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामीण जमीन, जलस्रोत, पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं इससे पहले परियोजना से जुड़ी तकनीकी जांच के लिए पहुंची बोरिंग मशीनों का भी ग्रामीणों ने विरोध किया था। अब सवाल सिर्फ प्लांट लगेगा या नहीं का नहीं, बल्कि यह है कि क्या सरकार और प्रशासन ग्रामीणों के सामने परियोजना के फायदे, संभावित प्रभाव, सुरक्षा व्यवस्था और लागू नियमों की पूरी तस्वीर सार्वजनिक करेंगे राजनीतिक बयान बाजी अपनी जगह है, लेकिन जनता के बीच उठ रहे सवालों का जवाब नारों से नहीं, दस्तावेजों, नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया से देना होगा।