राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। बघेली साहित्य मंच रीवा के बैनर तले डॉक्टर लाल जी गौतम के कहानी संग्रह “कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन” का सरस्वती वंदना के बाद मंचासीन अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन किया।डॉ. चंद्रिका प्रसाद चंद्र ने अपने वक्तव्य में कहानी संग्रह के शीर्षक से असहमति जताते हुए कहा, यद्यपि कहानी का मूल भाव, शीर्षक को संबोधित नहीं करता है, किन्तु लालजी की कहानियों की विशेषता है कि वह कहानियों को गुनते और जीते हैं। किशन तिवारी पात्र कहानी की समीक्षा की। लालजी ने देसी बोली को ठेठ रूप में व्यक्त किया है। आजकल के लेखक जातियां ढूंढ कर निकालते हैं, अपनी कहानियों में।

कहानियों में गहराई कम है
लालजी की कहानियों में व्यापकता तो है, पर गहराई कम है। जैसे प्रेमचंद की कहानियों में व्यापकता है। सत्य कथा कहानी नहीं होती। लेकिन कहानी सत्य के बहुत निकट होती हैं। लालजी अपनी कहानियों के प्रकाशन के पूर्व उन्हें अपनों के बीच पढ़ कर सुनाते भी हैं। और ख़ास यह कि हर टिप्पणी, हर टीका पर ध्यान देते हुए, प्रकाशन पूर्व सुधार कर लेते हैं। ऐसा कोई नहीं करता। यह लालजी की विशेषता है, इसीलिए वह अद्वितीय है।
अतीत सभी को आकर्षित करता है
प्रोफेसर दिनेश कुशवाह जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि लालजी के कहानी संग्रह का शीर्षक एक फिल्मी गीत से मिलता जुलता है “वह जवानी-जवानी नहीं जिसकी कोई कहानी नहीं”! उन्होंने बताया कि लालजी की संवेदनशीलता, ईमानदारी, उनकी कहानियों में स्पष्ट होती है। मोबाइल के दुष्प्रभाव की भी चर्चा की। अतीत सभी को आकर्षित करता है। कहानीकार की बहुमुखी प्रतिभा को समक्ष रखते हुए कहा कि लालजी गौतम की पुरानी कहानी “सोनखर्ची” को प्रेमचंद की कहानियों के समतुल्य बताया।
जमीनी कहानियां हैं लालजी की
प्रोफेसर सेवाराम त्रिपाठी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि लालजी की कहानियां अपने आसपास से आती हैं। जमीनी कहानियां हैं। हत्यारे को मारना हो तो चाकू से और किसी संवेदनशील व्यक्ति को मारना हो तो संवेदना से मारेगा। उन्होंने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण इकाई परिवार को बताया।

प्रेमचंद की परंपरा की कहानियां
जबलपुर से आए हुए समीक्षक कवि हनुमंत किशोर शर्मा ने महाभारत, रामायण का उदाहरण देकर बताया कि कहानी का स्वरूप वहीं से उद्गमित हुआ था। लालजी गौतम की कहानियों की तारीफ़ करते हुए कहा कि आप की कहानी वसुधा जैसी पत्रिका में भी छप चुकी हैं। प्रेमचंद की परंपरा की कहानियों को “कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन” के समान ही बताया। जातिगत ताना-बाना भी इन कहानियों में वर्णित है। अंतर्जातीय विवाह कहानियों के रूप में, समझ में अवतरित हुआ। विमोचन किसी भी कहानीकार के लिए अनमोचन नहीं होता।
झकझोर देती हैं अंतर्मन को कहानियां
कार्यक्रम संयोजक एवं प्रखर वक्ता डॉ. भारतेंदु मिश्र ने कहा, कि लालजी गौतम की कहानियां अंतर्मन को झकझोर देती हैं। न्याय व्यवस्था, जाति व्यवस्था, पर तंज करती हैं। एकांगी व्यवस्था को समरूप करने का प्रयास करती हैं। प्रभाकर चतुर्वेदी ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए लालजी गौतम को बधाई दी। डॉ. विवेक द्विवेदी ने कहा कि, कभी भी व्यक्ति को अपनी लेखनी नहीं बंद करनी चाहिए। मैंने भी बहुत कहानियां लिखीं लेकिन मैं अभी प्रकाश में नहीं आया। लेकिन ऐसा नहीं है, किसके ऊपर कब प्रकाश पड़े कोई नहीं जानता। और युवाओं को प्रेरणा दी।
कहानी को अपने ऊपर कनेक्ट कर रहा
डॉ. बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि किशन तिवारी की कहानी, कहानियों की सरलता तथा सत्यता की खूबसूरती वर्णित करती हैं। महिला सशक्तिकरण के ऊपर आधारित दसवीं कहानी के बारे में कहा कि कहानियों में कहानीकार तथा पाठक, कहानी को अपने ऊपर कनेक्ट कर रहा है, तो कहानी सफल है।
कोरी कल्पना की कहानी नहीं
बघेली साहित्य मंच के अध्यक्ष भृगुनाथ”भ्रमर” ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि वर्षों के परिश्रम से रची गई ये 10 कहानियां, कोरी कल्पना की कहानी नहीं गढ़तीं, बल्कि सत्य कथाओं पर आधारित है। पुस्तक में लालजी गौतम का समर्पण वाक्य, लेखकों के लिए प्रेरक बनकर कुछ सोचने और आधुनिक समाज को समझने को इशारा करता है। इनकी मेहनत का नतीजा है, उन्होंने जीवन में जो देखा है, उसी दर्शन को कहानियों में वर्णित किया है।
सत्यकथा से कहानी नहीं चलती
डॉ. लालजी गौतम ने अपने कहानी संग्रह की विषय वस्तु पर अपनी बात रखते हुए कहा कि, कल्पना के सहारे लेखन नहीं होता। निर्मल वर्मा से लेकर जैनेंद्र जी की कहानियों के ढंग को याद दिलाते हुए, विडंबना मूलक शीर्षक से अपनी प्रथम कहानी के बारे में बताया। कहानी कितनी भी ऊंचाई में चली जाए, उसमें किस्सागोई नहीं हो, तो वह कहानी नहीं होती।सिर्फ सत्यकथा से कहानी नहीं चलती। वह संकेतात्मक होती है। ऐसे ही एक-एक करके अपनी सारी कहानियों के बारे में संक्षेप से बताते हुए कहा कि, बुद्ध की खोज जिस प्रकार अशोक ने की, वैसे ही ट्रंप को भी अगर बुद्ध की खोज मिल जाए तो ट्रंप तक मिलने की उन्होंने बात कर अपनी वाणी को विराम दिया।
कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टर विद्या प्रकाश तिवारी, डॉ. आरती तिवारी, रमाकांत तिवारी, संगीत पांडे, ओमप्रकाश मिश्रा, डॉक्टर योगेंद्र तिवारी , इंदिरा अग्निहोत्री, सुरेश शर्मा, शत्रुघ्न तिवारी,गीता स्वाध्याय मण्डल के सदस्यगण, दीपक, दिनकर पाठक, एसपी तिवारी, प्रकाश त्रिपाठी, अवध बिहारी पांडे, लालजी गौतम का समस्त परिवार, माधवी मिश्रा, माया पाण्डेय, गीता गौतम, प्रसून मिश्रा, प्रदीप तिवारी, किशन अग्निहोत्री, स्नेहा त्रिपाठी, सत्यम शुक्ला, अपूर्व चतुर्वेदी, सचिन पाण्डेय इत्यादि लोग मौजूद रहे। आभार प्रदर्शन डॉ भारतेंदु मिश्र जी ने किया।