राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट (ब्यूरो)। बालाघाट जिले में इन दिनों बाघांे का आंतक लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बाघ कोर एरिया से निकलकर बफर इलाके में आ रहे हैं।उनका इंसानांे से सीधा टकराव हो रहा है। लगातार बाघ इंसानों पर हमला भी कर रहे हैं। कान्हा क्षेत्र के बाद अब खैरलांजी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पांडरवानी में मवेशी चराने गये एक कृषक पर बाघ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा बाघ ने दो मवेशियों का शिकार किया। इस घटना के बाद पूरे इलाके के लोग दहशतजदा हैं। साथ ही वन विभाग के प्रति आक्रोशित हैं।

जंगल में बाघमारे का शव मिला
ग्राम पांडरवानी निवासी देवकराम वाघमारे खेती-किसानी का कार्य करते थे। 9 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे वे एक गाय और उसके बछड़े को चराने के लिए गांव से लगे जंगल की ओर गए थे। देर शाम तक जब देवकराम घर वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। परिजन देर रात तक आसपास के क्षेत्र में खोजबीन करते रहे, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। 10 अगस्त की सुबह जब ग्रामीण उनकी तलाश में निकले तो गांव के श्मशान घाट से लगे जंगल में किसान देवकराम पिता श्यामलाल बाघमारे का शव मिला।
एक गाय और बछड़ा भी मृत
वहीं घटनास्थल के पास एक गाय और उसका बछड़ा भी मृत अवस्था में मिले हैं। जिससे बाघ द्वारा उनका शिकार किये जाने की आंशका जाहिर की गई और इससे जुडे साक्ष्य भी मौके पर मिले। जिसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया। उन्हें एक गाय और उसका बछड़ा मृत अवस्था में दिखाई दिया। वहीं पास में देवकराम भी खून से लथपथ अवस्था में मृत मिले। घटनास्थल के आसपास वन्यप्राणी के पंजों के निशान और हमले के चिन्ह भी बताए जा रहे हैं, जिसके चलते ग्रामीणों ने बाघ के हमले की आशंका जताई है।

अपना शिकार बना लिया होगा
ग्रामीणों ने अनुमान लगाया है कि बाघ ने पहले गाय और बछड़े पर हमला किया होगा। जिसके बाद देवकराम को भी बाघ ने हमला कर अपना शिकार बना लिया होगा और बाघ के हमले से देवकराम की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मिरगपुर सरपंच दीपक देशमुख मौके पर पहुंचे और वन विभाग को सूचना दी। सूचना के बाद वन विभाग का अमला घटनास्थल पर पहुंचा और मामले की जांच शुरू की। वन विभाग की टीम द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर वन्यप्राणी के हमले से जुड़े साक्ष्य जुटाए गये।
मिली तात्कालिक सहायता राशि
इस घटना के सामने आने के बाद आवश्यक कार्यवाही पूर्ण कर वन विभाग द्वारा मृतक के परिजनों को तात्कालिक सहायता राशि के रूप में 50 हजार रुपये प्रदान किए गए है। वही शासन के नियमों के अनुसार मृतक के परिवार को कुल 08 लाख रुपए की राशि प्रदान की जाएगी। शेष 07 लाख 50 हजार रुपए की सहायता राशि का प्रकरण वन विभाग द्वारा तत्परता के साथ तैयार किया जा रहा है।

सावधानी बरतने की समझाइश
घटना के बाद वन विभाग द्वारा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार निगरानी बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। वाहन में स्पीकर लगाकर ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कराई जा रही है तथा ग्रामीणों को बाघ की मौजूदगी को लेकर सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की समझाइश दी जा रही है। मवेशी गारा स्थल पर ट्रैप कैमरा लगाया गया है, जिसके माध्यम से हिंसक वन्यप्राणी बाघ की निरंतर निगरानी की जा रही है। वन अमला आसपास के क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहा है तथा बाघ के विचरण से संबंधित साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं।