राष्ट्रमत नई दिल्ली(ब्यूरो)।सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस की ज्यादती की जांच कर रही कमेटी को अब तक बहुत कम शिकायतें मिली हैं। पर्याप्त सामग्री नहीं होने के कारण कमेटी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।

शिकायतकर्ता हलफनामे के साथ पहुंचा था
पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) ने कोर्ट को बताया कि शिकायतों के लिए पोर्टल और ईमेल की व्यवस्था करने के बावजूद लोगों ने बहुत कम शिकायतें दर्ज कराईं। 29 अक्टूबर को कमेटी की बैठक में सिर्फ एक शिकायतकर्ता हलफनामे के साथ पहुंचा था।कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पीड़ितों की ओर से दाखिल वीडियो, याचिकाएं और हलफनामे कमेटी को भेजने की अनुमति दी। साथ ही निर्देश दिया कि कमेटी संबंधित पक्षों से जवाब लेकर नियमित अंतराल पर अंतरिम रिपोर्ट पेश करे।

कार्यालय में कोई शिकायत नहीं मिली
कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया था। इस पर शिकायतकर्ता को नाम, आधार नंबर या दूसरी पहचान संबंधी जानकारी देना जरूरी नहीं है। पोर्टल तक पहुंच सिर्फ कमेटी के चेयरमैन और संबंधित लोगों की है।कमेटी ने देशभर के 149 अखबारों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर शिकायतें आमंत्रित की थीं। ईमेल, डाक और कार्यालय में सीधे शिकायत देने की सुविधा भी रखी गई थी। 17 अक्टूबर को प्रेस रिलीज जारी की गई और 21 अक्टूबर को दोबारा शिकायतें मांगी गईं। इसके बावजूद पोर्टल पर बहुत कम शिकायतें आईं और ईमेल, डाक या सीधे कार्यालय में कोई शिकायत नहीं मिली।