सांप काटने पर अस्पताल ले जाएं,डेढ़ साल में 290 मरीज बचाए गए- डाॅ.राणा - rashtrmat.com

सांप काटने पर अस्पताल ले जाएं,डेढ़ साल में 290 मरीज बचाए गए- डाॅ.राणा

राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो)।बारसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खेतों, जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी भरने के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। जिससे लोगों के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है।  राहत की बात यह है कि सर्पदंश की घटना के बाद समय पर जिला अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा रही है।


290 मरीज बचाए गए
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले डेढ़ वर्षो में जिले में 300 के आसपास सर्पदंश के मामले सामने आए हैं। इनमें वर्ष 2025 में 05 तथा वर्ष 2026 में जून माह तक 03 लोगों की मौत हुई है। जबकि जिला अस्पताल में लगभग 290 मरीजों का सफल उपचार कर उनकी जान बचाई गई है।
तीन माह में 48 मरीज भर्ती हुए
जिला अस्पताल से आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के अप्रैल माह में 11, मई माह में 19 तथा जून माह में 18 सर्पदंश के मरीज भर्ती किए गए थे। इनमें अप्रैल माह में 2 मरीजों की मौत हुई।जबकि अन्य सभी मरीजों का सफल उपचार कर उन्हें स्वस्थ किया गया। अस्पताल में प्रशिक्षित चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में ग्राम मंडवा निवासी पवन सोनवाने नामक मरीज शनिवार से भर्ती है, जिसे कोबरा सांप ने तीन दफा काटा है। लेकिन चिकित्सकीय टीम ने उनकी जान बचा ली है और वे धीरे धीरे स्वस्थ हो रहे है।
एंटी स्नेक वेनम एंटी वेनम
जिला अस्पताल में पदस्थ मेडिकल विशेषज्ञ डाक्टर अंकित राणा के अनुसार बालाघाट क्षेत्र में मुख्य रूप से हीमोटाक्सिक और न्यूरोटाक्सिक प्रजाति के जहरीले सांपों के काटने की घटनाएं अधिक होती हैं। जिले में पाए जाने वाले चार प्रमुख जहरीले सांपों के विष का प्रभाव अलग.अलग हो सकता है। लेकिन सभी के उपचार का प्रभावी और वैज्ञानिक माध्यम केवल एंटी स्नेक वेनम एंटी वेनम है।
इन सांपों के काटने से हो जाती है मौत
डाक्टर राणा ने बताया कि हीमोटाक्सिक वाइपर के विष से रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। जबकि न्यूरोटाक्सिक विष शरीर की नसों पर असर डालकर लकवे जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकता है। जिले में कोबरा नाग, कामन करैत ,डांडेकार.सफेद पट्टीदार बेंडैड करैत,डंडेकारपीली पट्टी के काटने के मामले सबसे अधिक आते हैं जो न्यूरोटाक्सिक विष वाले सर्प होते है। जबकि रसल वाईपर जर्रारा. शरीर मे चठ्ठे के काटने के सामने बहुत कम आते है जो हीमोटाक्सिक विष वाला सर्प होता है। याने कोबराए कामन करैत, बैंडेड करैत ऐसे सर्प होते हैं जिनके कांटने पर जनहानि का खतरा अधिक होता है।
सांप काटने पर सीधे अस्पताल ले जाएं
चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने या झाड़.फूंक का सहारा लेने के बजाय मरीज को तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। यदि संभव हो तो सांप की पहचान या उसकी प्रजाति की जानकारी चिकित्सकों को दें। इससे उपचार में सुविधा होती है। हालांकि उपचार का निर्णय मरीज में दिखाई देने वाले लक्षणों के आधार पर किया जाता है। कई बार बिना विष वाले सांप भी काट लेते हैं जिनसे गंभीर लक्षण नहीं होते। लेकिन इसकी पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच से ही संभव है।

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