अजहर हाशमी की गजलें - rashtrmat.com

अजहर हाशमी की गजलें

अजहर हाशमी हिन्दी साहित्य के एक प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। संत परंपरा के वाहक थे। सूफी परिवार से थे,गीता और कुरान दोनों पर अधिकार से बोलते थे। मुझे राम वाला हिन्दुस्तान चाहिए 90 के दशक में उनकी यह कविता बेहद लोकप्रिय हुई। बेटियां पावन दुआएं हैं,कविता पर बेटी बचाओ अभियान सन् 2011 में सरकार ने शुरू किया। यहां उनकी तीन ग़ज़लें दी जा रही है।उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। राजस्थान के निवासी थे,रतलाम में रहते थे,75 साल की आयु में उनका निधन हो गया।

बेटियां रक्षाकवच-सी…

बेटियां तो शुभ शकुन की टिकलियां हैं

बेटियां आंखों की दृष्टिपुतलियां हैं

घर अगर तन है तो इस तन के हृदय की

बेटियां रक्षाकवच-सी पसलियां हैं

द्वार पे हल्दी से, मां के साथ मिलकर

बेटियां शुभ-लाभ लिखती उंगलियां हैं

तीज या त्योहार की हैं गीतिकाएं

बेटियां वर्षा-त्रऋतु की कजलियां हैं

परिवार की पूनी का कतता सूत जिन पर

बेटियां तो दरअसल वे तकलियां हैं

स्नेह के रिश्तों से घर को बांधती हैं

बेटियां सद्भाव-गुंथित सुतलियां हैं

बेटियां यूं तो सृजन की देवियां पर

दुष्ट के विध्वंस को वे बिजलियां हैं

भ्रूण-हत्या का न उन पर जाल फेंको

बेटियां हैं बेटियां, नहीं मछलियां हैं।

        पिता

बच्चों के लिए स्नेह-दुआ-प्यार है पिता

परिवार इमारत है तो आधार है पिता

कठिनाइयों के कांटे हटाता है राह से

रक्षा-कवच है, ढाल है, हथियार है पिता

बच्चों के मनोबल को बढ़ाता है हमेशा

बच्चों के लिए शक्ति का संसार है पिता

जब उपनिषद् ने ‘पितृ देवो भव’ कहा

तभी स्पष्ट हो गया कि असरदार है पिता

संतान बुलंदी को छुए इसलिए हर पल

खुद अपने ही बलिदान को तैयार है पिता

पावन हदीस इसलिए सदियों से कह रही

मां के चरण में स्वर्ग, स्वर्ग-द्रार है पिता।

नदी-जंगल बचे रहेंगे तो…

न तो काटें, न कटने दें जंगल

तब ही दुनिया को मिल सकेगा जल

जंगलों का हरा-भरा रहना

जैसे धरती पे नीर के बादल

वन की ‘हरियाली’ से ही तो नदियां

अपनी आंखों में आंजती ‘काजल’

बहती नदियां धरा की धड़कन है

यानी धरती का दिल सघन जंगल

नदी-जंगल बच्चे रहेंगे तो

लाभ-शुभ-स्वास्थ्य, सर्वदा मंगल।

अजहर हाशमी

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