थाने में महिला से मारपीट,चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज - rashtrmat.com

थाने में महिला से मारपीट,चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज

राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो)। किरनापुर थाना में चोरी के मामले की पूछताछ के दौरान महिला से कथित मारपीट और बर्बरता के आरोपों की जांच कर रही SIT ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की है। जांच के आधार पर किरनापुर थाना  के तत्कालीन SI दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

विशेष जांच दल गठित

जानकारी के अनुसार, 2 सितंबर को किरनापुर पुलिस ने टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी और उनकी करीब दो माह की गर्भवती पत्नी सावित्री चौधरी को डाकघर में हुई चोरी के संदेह में थाने लाया था। आरोप है कि थाने में महिला के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट की गई तथा उसके पति को फांसी की धमकी देकर अपराध स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया गया। 7 सितंबर को परिजन गर्भवती सावित्री चौधरी को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर लेकर पहुंचे, जिसके बाद मामला सामने आया। पुलिस अधीक्षक ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया था।

महिला के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की

SIT के मुताबिक महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाना  में रखे जाने, डराने-धमकाने, अनुचित दबाव बनाने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी जैसी बातें जांच में सामने आई हैं। महिला की सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी के लिए सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट से आवश्यक पूर्व अनुमति भी नहीं ली गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस अधिकारियों ने शिकायतकर्ता महिला के देवर दीपक चौधरी, निवासी नेवरा, के कथित इकबालिया बयान को आधार बनाकर महिला के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की। विशेष जांच दल ने इसे विवेचना की गंभीर कमी माना और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की समुचित जांच की आवश्यकता बताई। जांच में महिला और उसके पति कैलाश चौधरी को अवैधानिक रूप से थाने में रोककर रखने, डराने-धमकाने तथा अनुचित दबाव डालकर संस्वीकृति प्राप्त करने के तथ्य भी सामने आने की बात कही गई है।बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के निर्देश पर  DSP प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में SIT गठित की गई!  SIT की जांच में महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रखे जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है।

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