राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट में व्यावसायिक शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के बाद पूरक परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाएं जांचने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे नाराज शिक्षकों ने शासन और प्रशासन से उन्हें लिखित आदेश देकर बहाल करने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि बहाली के बिना वे उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं करेंगे, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इन उत्तरपुस्तिकाओं की जांच कौन करेगा।
मानदेय घटा दिया गया
शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2020 तक उनकी सेवाएं लगातार जारी थीं, लेकिन 2021 के बाद से उन्हें हर साल ‘सर्विस ब्रेक’ के नाम पर कभी 10, 20 दिन तो कभी महीनों तक कार्यमुक्त रखा गया। यह प्रक्रिया आज भी जारी है। हाल ही में, उन्हें 1 जून से कार्यमुक्त कर दिया गया है।कार्यमुक्त होने के बावजूद उन्हें व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पूरक परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाएं जांचने को कहा जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों ने यह भी बताया कि 2023 में उनका वेतन 20 हजार से बढ़ाकर 22 हजार रुपये किया गया था, लेकिन जनवरी 2024 से उनका मानदेय फिर से घटाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है।
महंगाई में वेतन कटौती
शिक्षक तरुण बिसेन ने कहा कि कार्यमुक्त होने के बाद वे किस अधिकार से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकते हैं। उन्होंने मांग की कि यदि शासन मूल्यांकन करवाना चाहता है, तो उन्हें कार्यमुक्त का आदेश रद्द कर वापस काम पर लिया जाए। शिक्षिका शारदा सोनेकर ने वेतन कटौती पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस महंगाई में वेतन कटौती से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आत्मदाह की चेतावनी
जिलाध्यक्ष प्रकाश ठाकरे ने कहा कि अन्य राज्यो में व्यवसायिक शिक्षकों को बेहतर मानदेय मिल रहा है, उनकी सेवाए पूरे वर्ष ली जा रही है। केवल मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां व्यवसायिक शिक्षकों को सर्विस ब्रेक के नाम पर कभी भी केवल व्हाट्सअप आदेश से बंद कर दिया जाता है। यह एक बड़ी समस्या है।यदि इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगी तो आत्मदाह भी करेंगे।