चावल घोटाला कांडः राजकुमार की गिरफ्तारी नहीं हुई तो SP दफ्तरका घेराव होगा - rashtrmat.com

चावल घोटाला कांडः राजकुमार की गिरफ्तारी नहीं हुई तो SP दफ्तरका घेराव होगा

 राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।  बालाघाट में करोड़ों रुपए के चर्चित चावल घोटाले में कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस सत्ताधारी पार्टी के दबाव में काम कर रही है और भाजपा जिलाध्यक्ष के रिश्तेदारों को गिरफ्तार नहीं कर रही है।एसआईटी द्वारा प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में कथित रूप से शामिल भाजपा नेताओं और अन्य आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस एसपी कार्यालय का घेराव करेगी और जिलेभर में उग्र आंदोलन शुरू करेगी।

हर्ष राइस मिल के संचालक को गिरफ्तार करें

विधायक मुंजारे ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए पूछा कि सिवनी और गोंदिया के मिलर्स को गिरफ्तार करने वाली बालाघाट पुलिस हर्ष राईस मिल के संचालक और उसके पार्टनरों को क्यों नहीं पकड़ रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे के भाई राजकुमार कावरे की फर्म में 20 प्रतिशत के पार्टनर को गिरफ्तार कर रही है, लेकिन 80 प्रतिशत के पार्टनर को क्यों नहीं।

रिश्तेदारों को बचाने में लगे हैं

मुंजारे ने यह भी बताया कि चावल घोटाले की शुरुआत हर्ष राइस मिल से हुई थी, लेकिन पुलिस केवल उनसे पूछताछ कर रही है, गिरफ्तारी नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में रिश्तेदारों के संलिप्त पाए जाने के बाद, भाजपा के पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे और गौरीशंकर बिसेन अपने-अपने रिश्तेदारों को बचाने में लगे हैं।

निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है

मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) द्वारा कार्रवाई को मीडिया से छिपाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। विधायक मुंजारे ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती है, तो कांग्रेस पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव करेगी।

रामकिशोर  को  पद से हटाया जाये

उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मांग की है कि बालाघाट के भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे को तत्काल पद से हटाया जाये। विधायक ने कहा कि वर्तमान एसआईटी जांच पर जनता का भरोसा कम होता जा रहा है। हमने इथेनाल प्लांट का निरिक्षण किया था, जहां हमें दस्तावेज नहीं दिखाए गए। इसमें उनकी भी संदिग्ध भूमिका है, जिसकी जाँच होना चाहिए। इसके अलावा अब तक एफसी आई की भूमिका पुलिस ने सामने नहीं लाया।