रेत तस्करी विवाद में BJP नेता को फॉर्च्यूनर में जिंदा जलाया, 3 मौत - rashtrmat.com

रेत तस्करी विवाद में BJP नेता को फॉर्च्यूनर में जिंदा जलाया, 3 मौत

राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर(ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के कोरिया में रेत तस्करी को लेकर भाजपा नेता समेत 3 लोगों की हत्या कर दी गई। आरोपियों ने फॉर्च्यूनर के आगे-पीछे हाईवा अड़ाकर रास्ता रोका, फिर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। इसमें भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह जिंदा जल गए।  साथियों को फरसे से काटा।

रास्ते में दम तोड़ दिया

कार में सवार भरत सिंह के भाई समेत 4 अन्य लोग किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन आरोपियों ने उनकी भी बेरहमी से पिटाई कर दी। फरसे से हमला किया। गंभीर रूप से घायल विरेंद्र सिंह (28) की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं उनके चचेरे भाई नागेंद्र सिंह (53) ने रायपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।

विधायक रेणुका सिंह का करीबी नेता है

जानकारी के मुताबिक रेत के अवैध खनन को लेकर लल्ला सिंह का भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी के परिवार से विवाद चल रहा था। मंगलवार रात 12 बजे मनोज त्रिपाठी से जुड़े लोगों ने भरत सिंह को घेरकर हमला कर दिया। मनोज समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह पहले कांग्रेस में थे। भूपेश सरकार के समय भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं आरोपी मनोज त्रिपाठी पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा विधायक रेणुका सिंह का करीबी नेता माना जाता है।

इलाज के दौरान  मौत हो गई

कार सवार भरत सिंह बुरी तरह से झुलस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जबकि उनके भाई नागेंद्र सिंह, विरेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह और मयंक किसी तरह बाहर निकले। कार से बाहर निकलते ही सभी की बेदम पिटाई की गई।विरेंद्र के गले पर फरसे से वार किया गया था, गंभीर हालात में उन्हें अंबिकापुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

4 गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा देर रात ही कोरिया पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। पुलिस और प्रशासन के सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंचे। पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जा रही है।भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह क्षेत्र के प्रभावशाली भाजपा नेताओं में गिने जाते थे और सोनहत क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती थी।

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