राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट में रसोइयों और महिला समूह को भुगतान एक बरस बाद भी नहीं होने से लोगों में रोष है। एक साल से वेतन नहीं मिल रहा है और धान खरीदी का सात लाख रुपए अभी तक बकाया है। जल्द भुगतान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी महिलाओं ने दी है।

महिलाओं ने प्रदर्शन किया
बालाघाट में मंगलवार को कई महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इन महिलाओं में आदिवासी बिरसा क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं के लिए भोजन बनाने वाली रसोइयां और वारासिवनी के लड़सड़ा स्थित लक्ष्मी तेजस्विनी स्वसहायता समूह की महिलाएं शामिल थीं। लक्ष्मी तेजस्विनी स्वसहायता समूह की सदस्य रामेश्वरी विजयवार ने बताया कि उनके समूह व्यय किए गए 7 लाख 16 हजार 887 रुपए की बकाया राशि का भुगतान प्रशासन ने अब तक नहीं किया है।
जून 2023 से वेतन बंद है
अस्पताल की रसोइयां वर्षा मराठे ने बताया कि वे बिरसा, सोनगुड्डा, मानेगांव, मंडई, कचनारी और दमोह सहित अन्य सरकारी केंद्रों पर भर्ती होने वाली प्रसूता महिलाओं को सुबह दूध-बिस्कुट, दोपहर में भोजन और दलिया बनाकर खिलाने का काम करती हैं।इस जरूरी सेवा के बदले उन्हें हर महीने सिर्फ दो हजार रुपए वेतन दिया जाता था। लेकिन जून 2023 से उनका यह वेतन भी बंद है, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
धान खरीदी के 7.16 लाख बकाया
लक्ष्मी तेजस्विनी स्वसहायता समूह की सदस्य रामेश्वरी विजयवार ने बताया कि उनके समूह ने वर्ष 2022-23 में सरकार के समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की थी। इस खरीदी के दौरान समूह के व्यय किए गए 7 लाख 16 हजार 887 रुपए की बकाया राशि का भुगतान प्रशासन ने अब तक नहीं किया है।उन्होंने बताया कि इस काम के लिए समूह ने बैंक और बाहरी स्रोतों से कर्ज लिया था। अब भुगतान न मिलने से वे कर्ज नहीं चुका पा रही हैं और भारी मानसिक और आर्थिक दबाव में जी रही हैं।
जल्द भुगतान न होने पर आंदोलन की चेतावनी
कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द बकाया वेतन और धान खरीदी की राशि का भुगतान कराया जाए, ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें और कर्ज के दलदल से बाहर निकल सकें।जल्द भुगतान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।