पंचायत सचिव ने हितग्राही की राशि किया गोलमाल,जांच में दोषी निकला - rashtrmat.com

पंचायत सचिव ने हितग्राही की राशि किया गोलमाल,जांच में दोषी निकला

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट,कटंगी(ब्यूरो)। जनपद पंचायत कटंगी की ग्राम पंचायत टेकाड़ी में मनरेगा की मां की बगिया योजना को पंचायत सचिव गौतम शिंदे ने हितग्राही की राशि को पत्नी सहित अन्य पांच लोगों के खाते में डलवा दिया।जांच दल ने जनपद सचिव को दोषी माना है।
दूसरी किश्त का गोलमाल किया
मां की बगिया योजना के तहत हितग्राही किसान दुर्गेश गौरे को निजी जमीन पर फलदार बगीचा लगाने के लिए 100 पौधे दिए गए थे। पौधों को 3 साल तक जीवित रखने पर सरकार से 1 लाख 33 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिलनी थी। लेकिन पंचायत सचिव ने हितग्राही की दूसरी किस्त की 23 हजार रुपए की राशि का गबन कर दिया। यह राशि सचिव ने अपनी पत्नी सारिका शिंदे सहित अंजना, शुभम, रोहित और वंदन सूर्यवंशी के बैंक खातों में ट्रांसफर करवा दी। मूल्यांकन नहीं होने से शेष राशि हितग्राही को आज तक नहीं मिली।
शिकायत वापस लेने दबाव
हितग्राही दुर्गेश गौरे ने पहले जनपद पंचायत कटंगी कार्यालय में शिकायत की। अधिकारियों ने शिकायत को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद किसान ने सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई। जांच दल ने पंचायत सचिव गौतम शिंदे को प्रथम दृष्टया दोषी मान लिया। लेकिन उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। उल्टे जांच दल ही हितग्राही पर सीएम हेल्पलाइन की शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहा है। किसान का कहना है कि जब तक उसे योजना की पूरी राशि 1 लाख 33 हजार रुपए नहीं मिल जाती,वह शिकायत वापस नहीं लेगा।
ऐसे मिलती है राशि
केंद्र और राज्य सरकार की मां की बगिया योजना मनरेगा के तहत संचालित होती है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण किसानों को उनकी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाकर आर्थिक रूप से मजबूत करना और पर्यावरण संरक्षण को बड़ावा देना है। योजना के नियम के अनुसार हितग्राही की भूमि पर 100 फलदार पौधे लगाए जाते हैं। इनमें आम, अमरूद, नींबू, सहजन, आंवला जैसी प्रजातियां शामिल होती हैं। पौधों की जियो टैगिंग और फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। इन पौधों की 3 साल तक देखभाल करने पर सरकार किस्तों में कुल 1 लाख 33 हजार रुपए देती है। पहली किस्त पौधे लगाने और जीवित रखने पर दूसरी किस्त दूसरे साल और तीसरी किस्त तीसरे साल में दी जाती है। यह राशि सीधे हितग्राही और मजदूरों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से जाती है। किसान दुर्गेश गौरे को वर्ष 2023 में इस योजना का लाभ स्वीकृत किया गया। पंचायत द्वारा उनकी 1 एकड़ निजी जमीन पर 100 फलदार पौधे लगवाए गए। पौधे लगाने के बाद दुर्गेश को पहली किस्त के रूप में 22 हजार 700 रुपए मिल गए। पौधे भी हरे भरे थे। किसान को उम्मीद थी कि 3 साल में बगीचा तैयार हो जाएगा और उसकी आय बड़ जाएगी।
 हितग्राही को नहीं मिली राशि
दूसरे साल जब पौधों की दूसरी किस्त जारी होने का समय आया तो दुर्गेश गौरे ने पंचायत सचिव से संपर्क किया। पंचायत सचिव उसे लगातार गुमराह किया। दुर्गेश को शक होने पर पड़ताल की पता चला कि उसके नाम से जारी 23 हजार रुपए की राशि 5 अलग लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। जांच दल ने भी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में पंचायत सचिव गौतम शिंदे को प्रथम दृष्टया दोषी माना है।

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