डॉ.राजेन्द्र मिलन की लघु कथा - rashtrmat.com

डॉ.राजेन्द्र मिलन की लघु कथा

डॉ.राजेन्द्र मिलन की लघुकथा पढ़ने पर सुकून देती हैं। इसलिए कि वो आम आदमी के मन की बात कहती हैं।   छोटी छोटी बातों को शब्दों का लिबास देते हैं। जमीं पर टिकी रहती हैं उनकी लघुकथाएं।

डॉ.  राजेन्द्र मिलन \  लघु कथा 

 -पॉकेट मनी

पुस्तकालयाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त सत्यमेव के परिवार में  एक पुत्र सचिन,पुत्रवधु श्यामा तथा नाती सात्यकि बस यही चार लोग थे।उनकी पत्नी परलोकवासी थी।

पुस्तकालय से रिटायर्ड होते ही सत्यमेव ने वर्षों से जोड़ा हुआ एक-एक पैसा गृह निर्माण में लगा दिया, यहां तक कि अब उनके रोजमर्रा  पुस्तकालय जाकर पत्र-पत्रिकाओं को पढ़ने के शौक में भी पैसे न होना

बाधक बन गये।तीन किलोमीटर दूर पैदल आने-जाने से परिवार के नियमित समय में एक साथ नाश्ता करना भी सम्भव नहीं रहा। परिवार को यह अनियमित व्यवधान अखरने लगा।

एक दिन नाती सात्यकि ने अपने पिता सचिन से पूछा कि जिस तरह आप मुझे पॉकेट मनी देते हैं तो दादाजी भी बचपन में आपको पॉकेट मनी देते होंगे। यदि आप उन्हें अब पॉकेटमनी देना शुरू कर दें तो वे किसी वाहन को भाड़ा देकर नियमित समय पर  ।।आने-जाने लगेंगे, समस्या स्वत:हल हो जाएगी।

नाती के इस सुझाव में दुविधा यह थी कि क्या दादाजी को यह रुचेगा ?

नाती ने तुरंत समाधान पेश कर दिया -पिताजी जबआप दादाजी के सामने पॉकेटमनी मुझे दें तो मैं तुरंत आपसे कहूंगा कि मेरी तरह दादाजी को अब वेतन नहीं मिलता तो पॉकेट मनी पर उनका भी हक़ बनता है, मिसाल के तौर पर जब आपकी

आय नहीं थी तो आपका दादाजी ने ख्याल रखा। विश्वास करिए आपको भी ऐसे हालात में गुजरने पर मैं भी आपको पॉकेटमनी दूंगा।

दादाजी के सामने यह खेला हुआ तो सत्यमेव अपने नाती के इस चातुर्य पर उसे बाहों में भरकर ढेरों आशीर्वाद के पुल बांधते हुए खूब हंसे।

 चुनाव चकल्लस

चुनाव होने को थे विपक्ष के उम्मीदवारों की जीत  हवा का रुख था इस सरकार की बढ़ती महंगाई भ्रष्टाचार के विरुद्ध पैदाइशी मतदाताओं ने बड़े विश्वास के साथ सरकार के विरुद्ध वोट भी डाले चुनाव संपन्न  हुए -परिणाम घोषित हुए  विपक्ष में खड़े उम्मीदवार हारते चले गये और चिंता में पड़ गये विपक्ष को जिताने के लिए ही जोर-शोर था हवा का रुख होने पर भी  परिणाम क्या निकला ?

जानकार लोगों का कहना था -हजारों वोटरों का काम चंद किराए के टट्टू करते हैं

अमीर लोग पैसों के लगाम से ही गरीबों का ईमान खरीदते हैं  हवा का रुख ही है राजनीति का है खेला। लोकतांत्रिक  हार -जीत का है झमेला।

डॉ. राजेन्द्र मिलन , आगरा

MO-   9808600607

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