राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।ग्रामीण अंचलों के गंभीर मरीजों को 108 एम्बुलेंस से निजी अस्पताल में पहुंचाने का वीडियो सोशल मीडिया में आया है। बताया जा रहा है कि निजी अस्पताल प्रति मरीज पर दो हजार रुपए एम्बुलेंस वालों को देते हैं।जाहिर सी बात है कि कमीशन पाने के लिए एम्बुलेंस वाले ऐसा कर रहे हैं। उनकी वजह से 108 की सेवा का दुरूप्रयोग हो रहा है। साथ ही मरीजों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। और इस गोरख धंधे में जो शामिल हैं,उनके खिलाफ कार्रवाई की आवाज उठ रही है।

वीडियो से हड़कंप
कुछ एम्बुलेंस चालकों ने मरीजों और उनके परिजनों को शासकीय अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए कथित रूप से प्रेरित कर उन्हे निजी अस्पताल लेकर जाते वीडियो में दिखे हैं। इस तरह के कुछ वीडियों पत्रकारांे को मिले हैं। यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल मरीजों के आर्थिक शोषण का मामला है,बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के मूल उद्देश्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।
भ्रमित कर रहें है मरीजों को
इस वक्त जिले में लगभग 44 जननी एक्सप्रेस और 108 संजीवनी एम्बुलेंस का संचालन किया जा रहा है। इन सेवाओं का प्रमुख उद्देश्य दुर्घटना,गंभीर बीमारी, प्रसूति अथवा अन्य आपात स्थितियों में मरीजों को शीघ्र एवं सुरक्षित रूप से निकटतम उपयुक्त शासकीय स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाना है। ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके। कुछ मामलों में एम्बुलेंस चालक मरीजों के परिजनों को विभिन्न प्रकार के तर्क देकर सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भ्रमित कर रहे हैं।
एम्बुलेंस कर्मियों से सांठ गांठ
यह माना जा रहा है कुछ निजी अस्पतालों और एम्बुलेंस कर्मियों के बीच कथित सांठगांठ का नेटवर्क सक्रिय है। आरोप है कि निजी अस्पतालों में मरीज पहुंचाने के एवज में एम्बुलेंस चालकों को प्रति मरीज लगभग दो हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाता है। इसके बाद मरीज और उसके परिजन निजी अस्पतालों के उपचार, जांच, दवाइयों और अन्य चिकित्सीय खर्चों के रूप में भारी आर्थिक बोझ झेलने को मजबूर हो जाते हैं। ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।
मामले की जांच की जाए
यह कथित खेल कोई नया नहीं है। बल्कि पिछले पांच से छह वर्षों से चल रहा है। उसका वीडियो अब जाकर आया है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहियें। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन,स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों को एम्बुलेंस संचालन की निगरानी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना चाहिए। ताकि मरीजों के हितों की रक्षा हो सके और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
इनका कहना है
जिले में 44 एम्बुलेंस संचालित है। पहली प्राथमिकता सरकारी अस्पताल तक पहुंचाने की रहती है। हमारे द्वारा एम्बुलेंस चालको को लेकर निंरतर बैठके की जाती है और एम्बुलेंस की गतिविधियों की जीपीएस मानीटरिंग की जाती है। मरीजो को प्राईवेट अस्पताल ना ले जाने के सख्त निर्देश दिये गये है। प्राईवेट अस्पताल लेकर जाने की हमें ऐसी कोई भी शिकायत अब तक नहीं मिली है।
पवन जैतवार, जिला प्रबंधक
एम्बुलेंस सेवा, बालाघाट ।