राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो)। जिले की भरवेली ग्राम पंचायत की सरपंच गीता अनिल बिसेन के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गुरुवार 4 मई को भारी बहुमत से पारित हो गया। पीठासीन अधिकारी एवं तहसीलदार सुनील वर्मा की निगरानी में हुई मतदान प्रक्रिया में सरपंच के विरोध में 18 मत पड़े जबकि उनके समर्थन में केवल एक वोट मिला। इसके साथ ही गीता बिसेन को सरपंच पद छोड़ना पड़ा। 21 वार्डों वाली भरवेली पंचायत में यह दूसरी बार था जब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। पहली बार वे अपनी कुर्सी बचाने में सफल रही थींए लेकिन इस बार विपक्षी पंचों ने बहुमत हासिल कर प्रस्ताव पारित करा लिया। 
अपना पद नहीं बचा सकीं
यह दूसरा मौका था जब पंचायत सरपंच गीता अनिल बिसेन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इससे पहले जब अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, तब विपक्षी पंच कामयाब नहीं हो पाए थे और सरपंच अपनी कुर्सी बचाने में सफल रही थीं। हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए और वे अपना पद नहीं बचा सकीं।
जनता के लिए बहुत काम किया
अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद पूर्व सरपंच गीता अनिल बिसेन ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरपंच के पद पर रहते हुए उन्होंने पंचायत के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके मुताबिक, पूरे जिले की तुलना में भरवेली पंचायत में सबसे ज्यादा विकास कार्य हुए हैं।उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनकी ‘बड़ी चूक’ बस इतनी थी कि वे पंचों की ‘निजी मांगें’ पूरी नहीं कर पाईं, जिसका नतीजा आज इस अविश्वास प्रस्ताव के रूप में सामने आया है। फिर भी उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि उन्होंने जनता के लिए बहुत काम किया।

उपसरपंच ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
दूसरी तरफ, उपसरपंच राजेश बाहेश्वर ने एक अलग ही कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि पंचायत में विकास कार्य तो अच्छे हुए हैं, लेकिन साथ ही जमकर भ्रष्टाचार भी हुआ है, जिसके खिलाफ पहले आंदोलन भी किए गए थे।उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब जो भी कार्यवाहक सरपंच बनेगा, उसके साथ मिलकर उन इलाकों में प्राथमिकता से काम किया जाएगा जहां विकास नहीं पहुंच पाया है।उन्होंने क्षेत्र की सड़क, बिजली, नाली और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करने का वादा किया। उपसरपंच राजेश बाहेश्वर ने कहा कि पंचायत में विकास कार्य तो हुए लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए। जिनके विरोध में पहले आंदोलन किए गए थे।